चार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की तृतीय पट्टाचार्य आचार्य धर्मसागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी का सुबह पिपलाई तहसील बामनवास में मंगल प्रवेश हुआ, जिसका सुनील जैन चैनपुरा दिगम्बर जैन समुदाय ने स्वागत किया l इस अवसर पर दिनेश चवरियां ने बताया कि आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी को दीक्षा लिए लगभग 51 वर्ष हो चुके हैं। पढ़िए जिनेंद्र जैन की यह रिपोर्ट...
बामनवास l आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की तृतीय पट्टाचार्य आचार्य धर्मसागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी का सुबह पिपलाई तहसील बामनवास में मंगल प्रवेश हुआ, जिसका सुनील जैन चैनपुरा दिगम्बर जैन समुदाय ने स्वागत किया l इस अवसर पर दिनेश चवरियां ने बताया कि आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी को दीक्षा लिए लगभग 51 वर्ष हो चुके हैं। इनके पिताजी भी श्रमण हुए हैं।
ये निवाई नगर से श्री शान्तिवीर नगर श्री महावीरजी पहुंचेगी, इस वर्ष माताजी का चातुर्मास श्रीमहावीरजी में होगाl सुनील जैन चैनपुरा ने बताया कि आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी की आहार व्यवस्था पिपलाई में मुखराम गुर्जर के यहां एवं प्रवास की व्यवस्था सीतोड में अजय गुर्जर के यहां की गई l इस व्यवस्था के लिए पिपलाई के जैन समुदाय ने गुर्जर समुदाय का आभार प्रकट किया l आर्यिका श्री श्रुतमति माता जी ने बताया कि पुराने समय में आज की भांति जाति प्रथा नहीं थी आचरण से ही व्यक्ति की पहचान होती थी l
उन्होंने ने बताया कि जैन इट इच ए नॉट ए कॉस्ट बट इट इच ए मेन्टेलिटि l जैन जाति नहीं यह मनोवृत्ति का नाम है l जैन शब्द जातिवाचक नहीं गुणवाचक है l इस अवसर पर अशोक भांजा, उर्मिला भांजा, त्रिलोक रजवास, संजय जैन श्रीमहावीर जी, सुरेन्द्र जैन शान्ति नगर, विमल एवं भाग्यवती पहाड़ी , नेमी सीरस, चंद्रेश जैन शिवाड़, संगीता एवं शोभा जैन, सलोचना जैन नल वाले, मधु चैनपुरा, बृजेन्द्र जैन, विनोद जैन, सुनील जैन, जिनेन्द्र जैन, रजनी जैन, आशा जैन, आशीष जैन, सुमनलता जैन, एकता जैन,अभिनन्दन जैन आदि कई श्रावक - श्राविकाएं उपस्थित थे l




