दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय माउंट आबू-उदयपुर धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा श्रद्धा, पर्यटन और सामाजिक सरोकार का प्रेरक संगम बनी। यात्रा में तीर्थ दर्शन, सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण एवं जीव दया का संदेश दिया गया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।
भिंड। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय राजस्थान (माउंट आबू-उदयपुर) धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा उत्साह, उल्लास और धार्मिक वातावरण के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यात्रा के दौरान सदस्यों ने प्रमुख जैन तीर्थों के दर्शन कर धर्मलाभ अर्जित किया तथा राजस्थान की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों का अवलोकन किया।प्रथम दिवस की शुरुआत

यात्रा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने केसरियाजी जैन मंदिर एवं नागफणी पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील में नौकाविहार, नेहरू गार्डन भ्रमण तथा अंडरवाटर एक्वेरियम का अवलोकन किया।

माउंट आबू और ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण

दूसरे दिन यात्रा दल ने विश्वविख्यात दिलवाड़ा जैन मंदिर के दर्शन कर उसकी अद्भुत स्थापत्य कला का अवलोकन किया। इसके बाद माउंट आबू की मनोरम वादियों एवं सनसेट पॉइंट का आनंद लिया। तीसरे दिन कुंभलगढ़ दुर्ग, विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवार, कुंभलगढ़ रिजर्व सफारी, हल्दीघाटी संग्रहालय तथा नाथद्वारा का भ्रमण किया गया।

मुनिश्री के दर्शन बने यात्रा का आकर्षण

यात्रा के अंतिम चरण में सदस्यों ने उदयपुर के सिटी पैलेस एवं सहेलियों की बाड़ी का भ्रमण किया तथा राजस्थान की लोक संस्कृति से परिचित हुए। यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त करना रहा।

जीव दया का दिया संदेश

दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड ने अपने जीव दया एवं मानव सेवा अभियान के अंतर्गत विभिन्न तीर्थ एवं सार्वजनिक स्थलों पर "Mind Your Step – कृपया देखकर चलें" संदेश वाले पोस्टर लगाकर जीव संरक्षण एवं जागरूकता का संदेश भी दिया।

आयोजकों का सराहनीय योगदान

यात्रा की विस्तृत जानकारी सचिव अंशुल–आयशा जैन ने दी। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष शैलेंद्र–पूनम जैन, सचिव अंशुल–आयशा जैन, कोषाध्यक्ष रविंद्र–सुधा जैन, शिरोमणि संरक्षक अशोक–जया जैन सर्राफ सहित समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यगण का विशेष योगदान रहा।

सामाजिक संदेश

यह यात्रा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रही, बल्कि धर्म, संस्कृति, सेवा, जीव दया और सामाजिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई। इस आयोजन ने सदस्यों में धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक एवं सामाजिक सौहार्द को भी सुदृढ़ किया।