भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर...
धामनोद। भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने आगे बताया कि हम भगवान की पूजा करते हैं लेकिन, हम भगवान पर और हमारी पूजा पर भरोसा नहीं करते हैं। अगर हमने भगवान की पूजा, अर्चना पूर्ण विश्वास, विवेक, श्रद्धा के साथ की है तो हमारे जीवन में कष्ट आ ही नहीं सकता। हमे कष्ट इसलिए आते है कि हम भगवान पर विश्वास ही नहीं करते। मुनिराज ने बताया कि हमें बड़े पुण्य योग से जैन कुल मिला है जो कि बहुत दुर्लभ है हमें पंच परमेष्ठि मिले हैं। उनका सम्मान करो। यथोचित सेवा, पूजा अर्चना करो।

जिससे कि आप के पाप कटेंगे और पुण्य मजबूत होगा। जो कि अगले भव भवांतर तक आपके साथ जाएगा। यदि यहां भी मायाचारी की तो वो कई जन्मों तक तुम्हे तुम्हारे कर्म नहीं छोड़ेंगे। धर्म क्षेत्र में कभी मायाचारी नहीं करना चाहिए। कर्म ने तीर्थंकरों को नहीं छोड़ा भगवान महावीर के जीव को भी नर्क भोगना पड़ा था कर्मों की वजह से। आप मंदिर में आते है तो पूजा अभिषेक आदि क्रियाएं करते हैं पर भाव नहीं होते हैं केवल एक दूसरे के देखने की वजह से करते हैं जिससे आपको आपकी क्रियाओं का लाभ नहीं मिलता। आप पुण्य करने आते है और यहां भी मायाचारी से पाप कर देते हो तो आपको पुण्य नहीं मिलता और कष्ट भोगते हो।

आपके नगर में साधु आते हैं तो पूरे नगर के पाप कटते हैं और आपके पुण्य करने के भाव होते हैं और यदि मेहमान आते हैं तो आप से अनजाने में भी पाप हो ही जाते हैं। अतः जब भी निर्ग्रन्थ साधु संत नगर में आए तो उनकी यथा योग्य आहार,बिहार,निहार, वैया वृत्ति करके पुण्य अर्जन करना साथ ही विनय ,विवेक और विशुद्धि का भी ध्यान रखना ताकि मुनिराज की चर्यानुकूल क्रिया करे। ताकि उनकी साधना में भी कोई दिक्कत ना हो।,प्रवचन पश्चात मुनि संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर को सामयिक धर्म की क्लास, प्रतिक्रमण हुआ एवं शाम को धर्म आधारित आनंद यात्रा संपन्न हुई। मुनि श्री संघ की आरती संपन्न हुई।

अहिंसा कॉन्सेप्ट जैन भजन संध्या होगी 

मुनि संघ का 31 तारीख को बावनगजा सिद्ध क्षेत्र में प्रातः मंगल प्रवेश होगा। जहां मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ के सानिध्य में और वहां पूर्व से विराजित उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी महाराज के सानिध्य में 31 दिसंबर 2025 की विदाई की रात में और नए वर्ष के आगमन में विश्व के सबसे पहले सबसे बड़े 84 फिट ऊंची भगवान ऋषभ नाथ के चरणों में अहिंसा कॉन्सेप्ट जैन भजन संध्या का भी किया गया है। इस भजन संध्या में देश की प्रसिद्ध भजन गायिका धन्य श्री जादू बिखेरेंगी।

1 जनवरी को प्रातः गुरु संघ सानिध्य में तीर्थ राज की वंदना की जाएगी। साथ ही 84 फिट उत्तुंग भगवान आदिनाथ के चरणाभिषेक और वृहद शांति धारा परम पूज्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के मुखारविंद से की जाएगी। इस अवसर पर लगभग चार राज्यों से गुरु भक्त आएंगे और धर्म लाभ लेंगे। शाम को मुनि संघ का प्रतिक्रमण गुरु भक्ति, भक्ति से परी पूर्ण आनंद यात्रा भी आयोजित की जाएगी। साथ ही मुनि संघ की और भगवान की आरती की जाएगी। यह जानकारी मनीष जैन द्वारा प्राप्त हुई ।