पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रथम शिष्य मनोज्ञसागर जी महाराज की संल्लेखनापूर्वक समाधि : आचार्य श्री वैराग्य नंदी जी द्वारा मुनि श्री की अस्वस्थता के चलते गत 2 वर्षों से वात्सल्यता, समर्पण से परिपूर्ण वैयावृत्ति की गई

पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के प्रथम शिष्य मुनि श्री मनोज्ञसागर जी महाराज का संल्लेखनापूर्वक समाधि मरण 24 फरवरी को रात्रि 10.05 बजे आचार्यश्री वैराग्यनंदी जी महाराज के सानिध्य में शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर में हुआ। समाजजनों ने मुनि श्री के श्री चरणों में कोटि-कोटि नमन प्रस्तुत किया है। सम्मेदशिखरजी से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट...
सम्मेदशिखरजी(झारखंड)। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के प्रथम शिष्य मुनि श्री मनोज्ञसागर जी महाराज का संल्लेखनापूर्वक समाधि मरण 24 फरवरी को रात्रि 10.05 बजे आचार्यश्री वैराग्यनंदी जी महाराज के सानिध्य में शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर में हुआ। समाजजनों ने मुनि श्री के श्री चरणों में कोटि-कोटि नमन प्रस्तुत किया है। मंगलवार को शाश्वत सिद्ध भूमि पर एक दैदीप्यमान सूर्य ने अपना मानव जीवन सफल कर लिया। आचार्य श्री वैराग्य नंदी जी के निर्यापकत्व और अनेक आचार्यों एवं अनेक साधुओं की उपस्थिति में संल्लेखना पूर्वक अत्यंत शांत परिणामों के साथ समाधि मरण हो गया है। दीक्षा प्रदाता आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ( ससंघ ) का अंतिम क्षणों तक आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री वैराग्य नंदी जी महाराज (ससंघ 30पिच्छी )ने मुनि श्री की अस्वस्थता के चलते गत 2 वर्षों से अत्यंत वात्सल्यता, समर्पण और आत्मीयता से परिपूर्ण की गई वैयावृत्ति के परिणाम स्वरूप उनकी 20 वर्षों की तपश्चर्या मानव जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता को प्राप्त हुई है।
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