मुरैना में वर्षायोग हेतु भव्य नगर प्रवेश के बाद आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने धर्म, इंसानियत, समाज की एकता और आत्मकल्याण पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने प्रेम, सहयोग और संगठन को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
मुरैना। वर्षायोग हेतु नगर प्रवेश के उपरांत श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर में आयोजित विशाल धर्मसभा में आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने धर्म के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक मनुष्य के भीतर इंसानियत जागृत नहीं होगी, तब तक धार्मिक क्रियाएँ अपने वास्तविक और सार्थक परिणाम नहीं देंगी।धर्म का आधार करुणा और विनम्रता
आचार्यश्री ने कहा कि धर्म केवल पूजा, जप, तप और अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका वास्तविक स्वरूप हमारे व्यवहार, विचार और चरित्र में दिखाई देना चाहिए। यदि जीवन में करुणा, दया, परोपकार और विनम्रता का अभाव है, तो बाहरी धार्मिक आडंबर आत्मकल्याण का माध्यम नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि सच्चा धार्मिक वही है जिसके हृदय में प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम, संवेदना और सेवा का भाव हो।
समाजहित को रखें सर्वोपरिधर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता है। प्रेम, विश्वास, सहयोग और सद्भाव समाज को सशक्त बनाते हैं, जबकि अहंकार, ईर्ष्या और गुटबाजी उसे कमजोर करती है। उन्होंने पदाधिकारियों से सम्मानजनक व्यवहार, संवाद और समन्वय बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाजहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
संत-सानिध्य का महत्वमुनिश्री उपशांतसागरजी महाराज ने कहा कि दिगम्बर संतों का सानिध्य दुर्लभ सौभाग्य है। संतों का त्याग, तप और संयम आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से संतों के दर्शन, वंदना, प्रवचन एवं वैयावृत्ति का अधिकाधिक लाभ लेने तथा उनके उपदेशों को जीवन में उतारने का आग्रह किया।
भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ नगर प्रवेशशनिवार 25 जुलाई को आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने मुनिश्री उपशांतसागरजी महाराज, ऐलकश्री उत्साहसागरजी महाराज एवं क्षुल्लकश्री उपकारसागरजी के साथ भव्य शोभायात्रा के माध्यम से मुरैना नगर में मंगल प्रवेश किया। बड़ा जैन मंदिर समिति एवं वर्षायोग समिति के नेतृत्व में समाजजनों ने वैरियर पर पादप्रक्षालन, आरती एवं श्रीफल भेंटकर आचार्य संघ की अगवानी की।
भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ आयोजनवैरियर चौराहे से प्रारंभ हुई शोभायात्रा एम.एस. रोड, नेहरू पार्क, पुल तिराहा, सदर बाजार, हनुमान चौराहा, सराफा बाजार एवं लोहिया बाजार होते हुए बड़ा जैन मंदिर पहुँची। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, आरती और जयघोष के साथ आचार्य संघ का स्वागत किया। जैन संस्कृत विद्यालय के छात्र पंचरंगी ध्वज लेकर चल रहे थे, जबकि महिला एवं पुरुष श्रद्धालु भजन-कीर्तन और जिनेन्द्र प्रभु के गुणगान में लीन रहे।
समाज के लिए प्रेरणादायी संदेशआचार्यश्री ने कहा कि मतभेद विचारों में हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। जब समाज एक परिवार की भावना से कार्य करेगा, तभी वह संगठित, संस्कारित और उन्नत बनेगा। उन्होंने सभी से धर्म को व्यवहार में उतारकर सेवा, सद्भाव और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।





