दिल्ली। ऋषभोदय में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिगंबर जैन धर्म के उन्नायक पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने कहा कि सत्य जीवन का श्रृंगार है और सत्यपूर्ण जीवन ही खुशहाल होता है। सत्य वस्तु का धर्म है और जीवन में सत्य को जानना, मानना तथा आचरण में उतारना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सत्य जीवन में हो, वाणी में हो और व्यवहार में भी दिखाई दे। सत्यपूर्ण जीवन कठिन अवश्य हो सकता है, लेकिन उसका फल श्रेष्ठ होता है।
सत्य सिद्धि और शांति का आधार
पट्टाचार्य श्री ने कहा, “सत्य जानो, सत्य मानो और सत्यपूर्ण जीवन जियो।” सत्य सुख का साधन, धर्म, व्रत और सिद्धि का मार्ग है। सत्य का संबंध अहिंसा और शांति से भी है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को केवल सत्य बोलने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सत्य को समझने और उसे जीवन में उतारने का पुरुषार्थ करना चाहिए।
पक्षपात से ऊपर उठकर जानें यथार्थ सत्य
सत्य को जानने की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए पट्टाचार्य श्री ने कहा कि जो यथार्थ सत्य को जानना चाहता है, उसे संप्रदाय, पंथ और पक्ष के आग्रह से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए। पक्षपात रहित दृष्टि ही सत्य को उसके वास्तविक स्वरूप में समझने में सहायक बनती है।
उन्होंने कहा कि सत्य को जानने वाला व्यक्ति दूसरों से भी जिज्ञासापूर्वक सत्य जानने का प्रयास करता है। सत्य को जानना और उसे स्वीकार करना दोनों ही साधना के विषय हैं।
वाणी से होता है व्यक्तित्व का परिचय
पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी ने वाणी के महत्व को समझाते हुए कहा कि व्यक्ति की वाणी से उसके ज्ञान, आंतरिक भाव और व्यक्तित्व का परिचय मिलता है। इसलिए बोलते समय शब्दों के प्रभाव का ध्यान रखना आवश्यक है।
सज्जनों की वाणी हित, मित और प्रिय होनी चाहिए। वचन ऐसे हों, जो स्वयं के साथ दूसरों के लिए भी कल्याणकारी बनें।
‘वाणी वीणा बने, वाण नहीं’
उन्होंने कहा कि मनुष्य की वाणी मिश्री के समान मधुर और वीणा के संगीत की तरह सुखद होनी चाहिए, वाण की तरह किसी के हृदय को चुभने वाली नहीं।
श्रेष्ठ और सज्जन व्यक्ति के विचार एवं वचन मधुर और कल्याणकारी होने चाहिए। सत्य बोलते समय भी भाषा में संयम, मधुरता और हित का भाव आवश्यक है।
कटु वचन के घाव लंबे समय तक रहते हैं
पट्टाचार्य श्री ने कहा कि कटु वचन कई बार हथियार से लगे घाव से भी अधिक गहरी पीड़ा दे जाते हैं। शारीरिक घाव समय के साथ भर सकता है, लेकिन कटु शब्दों से मिली पीड़ा लंबे समय तक मन में रह सकती है।
उन्होंने संदेश दिया कि मधुर सोचें, मधुर बोलें और व्यवहार में भी मधुरता रखें। सत्य और मधुर वाणी व्यक्ति को सबका प्रिय बनाती है।




