इंदौर। दलालबाग मैदान में आयोजित विशाल धर्मसभा में मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मनुष्य की श्रद्धा किसी मनोनुकूल परिणाम पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यदि शांतिधारा, पूजा या आराधना के बाद भी इच्छानुसार कार्य सिद्ध न हो, तो विश्वास को कमजोर नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए धर्म के पीछे चलता है, तो वह साधना का वास्तविक अर्थ नहीं समझ पाता। भगवान के प्रति श्रद्धा निष्काम होनी चाहिए। उनके दर्शन, नाम-स्मरण और चरणों में समर्पण का भाव ही जीवन को मंगलमय बनाता है।
भगवान से मांगने के बजाय समर्पण करें
मुनि श्री ने कहा कि प्रभु के पास जाने का उद्देश्य केवल सांसारिक वस्तुएं मांगना नहीं होना चाहिए। भगवान के दर्शन, ध्यान और वीतराग स्वरूप का स्मरण ही साधक के लिए श्रेष्ठ मंगल है। श्रद्धा में अपेक्षा कम और समर्पण अधिक होना चाहिए।
सही मार्ग की पहचान आवश्यक
मुनि श्री ने कहा कि जीवन में केवल रास्ते खोजने में समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए, बल्कि सही मार्ग पर चलना चाहिए। अनेक मार्ग ऐसे होते हैं, जो मंजिल तक नहीं पहुंचाते। साइन और साइन बोर्ड के अंतर को समझाते हुए उन्होंने कहा कि मार्गदर्शन को सही ढंग से समझकर जीवन की दिशा निर्धारित करनी चाहिए।
9 नवंबर को होगा कलशों का निष्ठापन
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि 9 नवंबर को चातुर्मास कलशों के निष्ठापन एवं वितरण का समारोह आयोजित होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे मंगलाष्टक के साथ होगा।
इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक महोत्सव, महापूजन, महाआराधना और निर्वाण लाडू समर्पण होगा। इसके पश्चात मुनि श्री के श्रीमुख से चातुर्मास कलशों का निष्ठापन किया जाएगा तथा भक्तों को कलश वितरित किए जाएंगे। श्रद्धालु कलशों को गाजे-बाजे के साथ अपने घर ले जाकर दीपावली पूजन में प्रतिष्ठित करेंगे।




