देहरा-तिजारा। चातुर्मास के अंतर्गत श्री चन्द्रतीर्थ मंडपम् में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने जैन समाज के अस्तित्व, एकता और जागरूकता को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। आचार्य श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अस्तित्व के विषय में सदैव विचार करते रहना चाहिए। चाहे मार्ग सांसारिक हो अथवा पारमार्थिक, दोनों ही मार्गों में अपने अस्तित्व की सुरक्षा और स्थायित्व पर चिंतन आवश्यक है।
संगठन और एकता आवश्यक
मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि पारमार्थिक मार्ग में साधु अपने अस्तित्व की सुरक्षा के लिए सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र की एकता रूप धर्म का विचार करते हैं। इन तीन गुणों के बिना साधु का अस्तित्व संभव नहीं है। इसी प्रकार समाज के अस्तित्व को मजबूत बनाए रखने के लिए भी जागरूकता, संगठन और एकता आवश्यक है।उन्होंने जनगणना में जैन समाज की संख्या को लेकर भी समाजजनों को जागरूक किया।
आवश्यक विवरण सही रूप से दर्ज करवाना चाहिए
आचार्य श्री ने कहा कि जैन समाज को जनगणना के समय धर्म के कॉलम में ‘जैन’, अतिरिक्त भाषा में ‘प्राकृत’ तथा अपनी पहचान से संबंधित आवश्यक विवरण सही रूप से दर्ज करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इन बातों के प्रति जागरूक रहेगा तो जैन समाज के अस्तित्व को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकेगा।
समाज के प्रति जिम्मेदारी समझें
आचार्य श्री ने कहा कि आज जैन समाज सरकारी जनगणना के आंकड़ों में जितना दिखाई देता है, वास्तविकता में उससे कहीं अधिक है। संख्या कम दिखाई देने के कारण समाज के तीर्थों एवं अधिकारों से जुड़े विषयों में अपेक्षित प्रभाव नहीं बन पाता। इसलिए प्रत्येक जैन को अपने समाज के प्रति जिम्मेदारी समझते हुए जागरूक होना चाहिए।
परिवार की एकता की तरह व्यवहार करें
अपने संदेश को सरल उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए आचार्य श्री ने कहा कि घर-परिवार में चार भाइयों के चूल्हे भले ही अलग-अलग हों, लेकिन जब एकता की बात आती है तो चारों भाई मिलकर एक परिवार के रूप में अपनी पहचान बनाते हैं। इसी प्रकार जैन समाज में मंदिर और स्थान भले ही अलग-अलग हों, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर सभी को एकजुट होकर ‘जैन’ के रूप में अपनी संगठन शक्ति और एकता का परिचय देना चाहिए।
आत्मचिंतन का संदेश दिया
इस अवसर पर आचार्य श्री ने प्रेरणादायी पंक्तियों के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन का संदेश दिया-कहो-कहो क्या करना है, जीवन किससे भरना है।अब तक क्या-क्या भूल हुई, क्या कर अब सुधारना है॥ज्ञानी का चिंतन, हो-हो-2, गुणवान बनाये रे।जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे॥
इन समाजजन की उपस्थिति रही
धर्मसभा में मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिब्बू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, वरुण जैन, अंशुल जैन, नरेन्द्र जैन पूर्व अध्यक्ष ,सुरेन्द्र जैन, रवि जैन, पवन जैन एवं कालू जैन उपस्थित रहे।



