अवधपुरी में प्रवचन देते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर ने जीवन में धन्यवाद और कृतज्ञता व्यक्त करने की आदत विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भावनायोग और परीक्षा के समय शांत चित्त रहने के सरल उपाय भी बताए। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू रिपोर्ट…

अवधपुरी में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान मुनि श्री प्रमाणसागर ने जीवन में धन्यवाद और आभार व्यक्त करने की संस्कृति को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव कृतज्ञता का प्रतीक रही है, किंतु आज पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में लोग इस सद्गुण से दूर होते जा रहे हैं। जिस व्यक्ति के जीवन में आभार व्यक्त करने का भाव नहीं होता, उसके भीतर सद्गुणों का विकास भी नहीं हो सकता।

मुनि श्री ने विशेष रूप से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिदिन मात्र पाँच मिनट का भावनायोग करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन में स्थिरता आती है। उन्होंने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन हेतु सरल टिप्स बताते हुए कहा कि पेपर मिलते ही गहरी सांस लेकर पहले शांत मन से प्रश्नपत्र पढ़ें, और फिर प्रसन्न भाव से उत्तर लिखना प्रारंभ करें।

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि जैन पंचांग अनुसार 20 अक्टूबर को रुप चौदस मनाई गई है तथा अवधपुरी विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में 21 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 9 बजे निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।