इंदौर। श्रमण संस्कृति के महाश्रमण, तीर्थंकर सम उपकारी मुनि श्री सुधासागर जी के पदार्पण से परिवार धन्य हुआ। रविवार को हमारे परिवार के लिए परम अहोभाग्य का दिन रहा। निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक आहार चर्या कराने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरुदेव के आहार हेतु पड़गाहन का सौभाग्य प्राप्त होते ही परिवार में हर्ष की लहर दौड़ गई। शुद्धि, भक्ति और नवधा भक्ति विधि पूर्वक नवधा भक्ति कर गुरुदेव को आहार कराया गया। आहार चर्या के पश्चात गुरुदेव ने परिवार को विशेष आशीर्वाद प्रदान कर धन्य किया। वरिष्ठ समाजसेवी एवं कार्य अध्यक्ष डॉ.जैनेन्द्र जैन ने कहा कि हम कृतज्ञ हैं कि भक्त के घर भगवान पधारे और हमें आशीष प्रदान कर धन्य किया। गुरुदेव का पदार्पण हमारे परिवार के लिए लिए तीर्थ के समान है। उनके आहार से घर पवित्र हो गया और परिवार को मोक्षमार्ग की प्रेरणा मिली।

सौभाग्यशाली परिवार

इस पुण्य अवसर पर डॉ. जैनेंद्र-मनोरमा जैन, मुक्ता-राजेश जैन (दद्दू), अतिशय जैन, साक्षी-सक्षम बड़जात्या, सविता-पवन मोदी, पिंकी-अनिल बजाज, निर्मला-प्रकाश कासलीवाल, कुणाल सोहिता, सम्यक-आयुषी सहित समस्त परिवार ने गुरुदेव की भक्ति कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सकल परिवार ने गुरुदेव के चरणों में बारम्बार नमोस्तु करते हुए उनके दीर्घायु और स्वस्थ रहने की मंगलकामना की।

क्या है नवधा भक्ति

जैन धर्म में मुनिराज को आहार कराने की विधि को नवधा भक्ति कहते हैं। पड़गाहन, उच्चासन, पाद प्रक्षालन, अर्चन, प्रणाम, मन शुद्धि, वचन शुद्धि, काय शुद्धि और एषणा शुद्धि - इन नौ विधियों से आहार कराना महापुण्य का कारण माना जाता है।