आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ के मंगल पावन सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गणधर वलय विधान संपन्न हुआ। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट...
आगरा। दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में हरीपर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज फील्ड के आचार्य श्री शांति सभागार में भव्य धार्मिक आयोजन गतिमान है। कार्यक्रम के दूसरे दिन आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ के मंगल पावन सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गणधर वलय विधान संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के कुशल निर्देशन में भगवान की शांतिधारा और पवित्र अभिषेक की क्रियाएं संपन्न की गईं। संगीतमय स्वरलहरियों के बीच इंद्र-इंद्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों ने पूजा-अर्चना की।यह हुए विधान में शामिल
विधान में सौधर्म इन्द्र यतेंद्र कुमार व अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन व नीलम जैन लुहाड़िया, यज्ञनायक इन्द्र सुरेश कुमार व माया जैन, ईशान इन्द्र जिनेन्द्र कुमार व अनीता जैन तथा चक्रवर्ती इन्द्र सुबोध पाटनी व शची पाटनी शामिल हुए। इसके साथ ही मोहन स्वरुप व नूतन जैन, रवि कुमार व बीना जैन, पदम चंद व प्रेमलता जैन, इन्द्र जितेंद्र कुमार व अंशु जैन, रमेश चंद व मधुलता जैन, वीरेन्द्र कुमार व पूनम जैन और राजेंद्र कुमार व विमलेश जैन परिवार ने मुख्य भूमिका निभाते हुए देव-शास्त्र-गुरु की आराधना की।
भक्ति रस में सराबोरविधान के इस द्वितीय दिन सभी भक्तों ने मिलकर गणधर गुरुओं को 520 अर्घ्य समर्पित किए। इस भव्य धार्मिक महोत्सव में लगभग 350 श्रद्धालु विधान की वेदियों पर बैठे हुए हैं और सभी भक्तगण भक्ति रस में सराबोर होकर नृत्य करते हुए धर्म लाभ ले रहे हैं।
ऋजुमति और विपुलमति को धारण कियाआर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैसे एक सुंदर महिला अपने रसोई को संभाल करके रखती है, कोष्ठ को संभाल करके रखती है, ठीक उसी प्रकार तीर्थंकर के ये सचिव, जिनको हम गणधर कहके बुलाते हैं, गणाधिपति कहके बुलाते हैं, गणीश कहते हैं, तमाम नामों के द्वारा उनका परिचय अभी आपको स्तवन के द्वारा सुनने को मिलेगा। तो ओ गणधर देव उन बुद्धि-ऋद्धि के माध्यम से, चार बुद्धियों को जिन्होंने अपने अंदर समाहित किया है, मनःपर्यय ज्ञान से उन्होंने ऋजुमति और विपुलमति को धारण किया है।
सभा अब साधारण सभा नहींआने वाला भक्त किस प्रकार का है, उसका चेहरा पढ़ा जा सकता है। परीक्षक है अथवा परीक्षा में बैठने आया है? यहाँ भी तमाम लोग बैठे हैं, कुछ इसलिए बैठे हैं कि क्या बोला जा रहा है, क्या पढ़ा जा रहा है, वो सही है अथवा गलत है। अगर गलत है तो उसको हम कुछ बोलने का अवसर ढूँढेंगे। मित्रों, ये सभा अब साधारण सभा नहीं है। इस सभा को अब गणधर की सभा कहिए, जिसमें 1492 गणधर का हमने यहाँ स्थापना करने का मन बनाया है।आचार्य इंद्र नंदी महाराज जी ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। धर्म सभा का कुशल संचालन महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार ने किया।
यह समाजजन रहे मौजूदधर्मसभा में मुख्य रूप से जितेंद्र जैन, पूर्व मंत्री सुनील जैन ठेकेदार, मनोज जैन बाकलीवाल,परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, उपमंत्री विमल जैन, अर्थ मंत्री राकेश जैन परदे वाले, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, अनन्त जैन, सतेंद्र जैन, दीपक जैन, कुमार मंगलम जैन, सुबोध जैन,प्रवीण जैन, पंकज जैन,सचिन जैन, प्रांजल जैन, उषा जैन, बीना बैनाड़ा, सपना जैन सहित सकल जैन समाज मौजूद था। 17 जून प्रातः 7 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका के सानिध्य में गणधर वलय विधान में अर्घ्य समर्पण शांतिसागर सभागार, हरिपर्वत आगरा में होंगे।




