इंदौर।विफलता हमारा भय है भ्रम है जबकि, सफलता हमारा मूल स्वरूप । कोई विफलता के लिए कार्य नहीं करता। सफलता मेरा स्वभाव है, स्वभाव को कोई बदल नहीं सकता। जल का स्वभाव शीतलता है, तुम उसको गर्म कर सकते हो, किंतु शीतलता नष्ट नहीं कर सकते। स्वभाव को विभाव कर सकते हो, किंतु स्वभाव कभी नष्ट नहीं होता। उक्त प्रेरक विचार मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने शनिवार को दलाल बाग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अध्यात्म व्यक्ति को समर्थ बनाने की बहुत बड़ी पूंजी है। जो भगवान में शक्तियां हैं वही भक्त के अनुभव में आ जाती है। मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म का मूल सूत्र है - तुम स्वयं सुखी हो जाओ, समृद्ध हो जाओ, निरावलंबी हो जाओ, पूर्ण हो जाओ। जब जब पर का आलंबन लेते हैं हमारी शक्तियां कमज़ोर होती है। दुनिया के पीछे चलने के बजाय तुम स्वयं एक कदम चलना सीखो। तुम चले और गिर गए कोई बात नहीं, आपने साहस तो किया। जो स्वयं एक कदम चल लेता है वह आगे सो कदम भी चल लेगा।
समय से व्यवस्था शुल्क अवश्य देना चाहिए
गुरुदेव ने कहा कि मंदिर हमारी आस्था का केंद्र है, मंदिर समिति द्वारा निर्धारित व्यवस्था शुल्क का भुगतान करना हमारा नैतिक एवं धार्मिक दायित्व है। आपको समय से व्यवस्था शुल्क अवश्य देना चाहिए। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज अखिल भारतीय जैन अल्पसंख्यक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री ललित गांधी, महामंत्री सौरभ भंडारी, मध्य प्रदेश संयोजक, डॉ.संजीव जैन, उमेश जैन, उज्जैन दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के महामंत्री सुनील जैन,विश्व हिंदू परिषद के अनिल कासलीवाल, धर्मेंद्र सेठी आदि ने गुरुदेव को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। गांधी जी ने गुरुदेव से मध्य प्रदेश में भी अल्पसंख्यक आयोग बनाने विषयक चर्चा की।
इन्होंने किया अतिथियों का सम्मान
चातुर्मास आयोजन समिति के मनीष गोधा, नवीन- आनंद गोधा, हर्ष जैन, आकाश जैन कोयला, धर्मेंद्र जैन, गिरीश जैन(गिन्नी ग्रुप), राहुल जैन आदि ने सभी आगंतुक अतिथियों का शाल श्रीफल से सम्मान किया। कार्यक्रम की शुरुआत में आचार्य श्री के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद संगम नगर महिला मंडल द्वारा अत्यंत भावपूर्ण मनमोहन मंगलाचरण नृत्य प्रस्तुत किया गया।
यह रहे मौजूद
इस अवसर पर डीके जैन, जैनेश झांझरी, सतीश जैन, मयंक जैन, राकेश गोयल, वीरेंद्र बड़जात्या, पंडित प्रदीप शास्त्री, पवन पाटोदी के साथ ही बहुत अधिक संख्या में समाजजन मौजूद थे। धर्म सभा का संचालन अर्पित जैन एवं अमित सिंघई द्वारा किया गया।



