एटा। शाश्वत तीर्थ क्षेत्र अयोध्या में गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के सान्निध्य में 30 जुलाई को दीप प्रज्ज्वलन के साथ इंद्रध्वज विधान स्वर्ण जयंती महोत्सव का शुभारंभ हुआ। 30 जुलाई से 15 सितंबर तक चलने वाले इस महोत्सव के अंतर्गत एटा में भी एक दिवसीय धार्मिक आयोजन किया गया।

इंद्रध्वज विधान की ध्वजाएं फहराईं

अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला संगठन एवं नेमिनाथ महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में एमपी नगर स्थित श्रीमती वर्षा जैन के आवास पर इंद्रध्वज स्वर्ण जयंती महोत्सव एवं गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की हीरक दीक्षा जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

संस्था की पदाधिकारियों ने इंद्रध्वज विधान की दस ध्वजाएं फहराईं और विधान की जयमाला क्रमांक 8 का महाअर्घ्य समर्पित किया। प्रथमाचार्य शांतिसागर जी महाराज के अर्घ्य के बाद आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की अष्टद्रव्य से पूजन की गई।

भक्ति नृत्य एवं मंगल आरती से सजा आयोजन

मंगलाचरण कु. आरु जैन ने भक्ति नृत्य के साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद सभी सदस्याओं ने गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी की मंगल आरती, भक्ति नृत्य एवं विनयांजलि प्रस्तुत की। श्रद्धालु महिलाओं ने माताजी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना की।

जैन संस्कृति की धरोहर हैं ज्ञानमती माताजी : बबिता जैन

जैन महिला संगठन की अध्यक्ष बबिता जैन ‘प्रेरणा’ ने कहा कि जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी जैन संस्कृति की धरोहर हैं। उनकी प्रेरणा से दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप हस्तिनापुर में संचालित है।

उन्होंने बताया कि माताजी की प्रेरणा से जम्बूद्वीप, तेरह द्वीप एवं तीन लोक की रचनाओं सहित अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों का निर्माण हुआ। महाराष्ट्र के मांगीतुंगी ऋषभगिरी में भगवान ऋषभदेव की 108 फुट ऊंची खड्गासन प्रतिमा की स्थापना भी उनकी प्रेरणा से हुई, जिसका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होने की जानकारी दी गई।

अनेक उपलब्धियों से जुड़ा है माताजी का जीवन

आयोजकों ने बताया कि वर्ष 2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल तथा वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मांगीतुंगी तीर्थ में विश्व शांति अहिंसा सम्मेलन का सूत्रपात किया गया था। माताजी की प्रेरणा से निर्मित अनेक तीर्थों, मंदिरों एवं रथ प्रवर्तन कार्यक्रमों में विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने उद्घाटन एवं शिलान्यास कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

वर्ष 2015 में अवध विश्वविद्यालय (फैजाबाद) तथा वर्ष 2012 में तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (मुरादाबाद) द्वारा माताजी को डी.लिट्. की मानद उपाधि से विभूषित किए जाने की जानकारी दी गई। माताजी जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की जन्मभूमियों के विकास की प्रेरणास्रोत तथा 500 से अधिक ग्रंथों की लेखिका हैं। इस वर्ष उनका 75वां वर्षायोग शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या में हो रहा है।

सदस्याओं ने अर्पित की विनयांजलि

इस अवसर पर श्रीमती मिथलेश जैन, वर्षा जैन, ऋतु जैन, अनु जैन, शिल्पी जैन, सारिका जैन, श्वेता जैन, रुबी जैन, प्रीति जैन, वंदना जैन, दीप्ति जैन, तन्वी जैन, वाणी जैन, किंजल जैन, आरु जैन सहित अनेक सदस्याओं ने माताजी को विनयांजलि अर्पित की।

9 अगस्त को भक्तामर प्रशिक्षण शिविर

श्री निर्मल वर्षायोग समिति की मीडिया प्रभारी बबिता जैन ‘प्रेरणा’ ने बताया कि 9 अगस्त, रविवार को दोपहर 3:30 बजे पुरानी बस्ती स्थित बड़े मंदिर जी में आचार्य श्री नयन जी महाराज के निर्देशन में भक्तामर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी शिविरार्थियों से निर्धारित समय पर मंदिर पहुंचकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया।