धर्मसभा में मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने जीवन की साधना और आत्म-विकास पर गहन विचार साझा करते हुए कहा कि तीन गलतियां ऐसी हैं जिन्हें हमें बार-बार नहीं दोहराना चाहिए। ये गलतियां व्यक्ति के विकास में बाधक बनती हैं। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट...
विदिशा। धर्मसभा में मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने जीवन की साधना और आत्म-विकास पर गहन विचार साझा करते हुए कहा कि तीन गलतियां ऐसी हैं जिन्हें हमें बार-बार नहीं दोहराना चाहिए। ये गलतियां व्यक्ति के विकास में बाधक बनती हैं और संबंधों, सोच और समय — तीनों को क्षति पहुंचाती हैं।(1) बिना सोचे बोलना महाराजश्री ने कहा कि वाणी पर नियंत्रण का अभाव और बिना सोच-विचार के बोले गए शब्द, कई बार रिश्तों में दरार डाल देते हैं। "शब्द बाण से भी अधिक घातक होते हैं। सोच-समझकर बोले गए वाक्य ही संबंधों को सहेजते हैं।"(2) हर किसी पर भरोसा करना विश्वास आवश्यक है, लेकिन अंधविश्वास या अंधा भरोसा दुखद परिणाम दे सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुभव और विवेक से ही सही निर्णय लिए जा सकते हैं। "हर मुस्कुराता चेहरा विश्वसनीय नहीं होता; पहले समझें, फिर भरोसा करें।"(3) कल पर टालना महाराजश्री ने आलस्य और टालमटोल की प्रवृत्ति को सबसे बड़ा समय-चोर बताया। "जो काम आज का है, उसे कल पर टालना न केवल अवसर गंवाता है, बल्कि आत्मबल भी कमजोर करता है।"