सीकर। आर्यिका श्री महायशमति माताजी ने कहा कि गुरु के बिना जीवन शुरू नहीं होता। गुरु अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है। पाप से पुण्य की और अधर्म से धर्म की ओर ले जाते हैं। मंगल धर्म देशना देते हुए पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पारस भवन दंग की नसिया आचार्य के श्री धर्म सागर सभागृह में कहा कि जैन धर्म अरिहंत भगवान का धर्म है क्योंकि यह केवलज्ञान रूपी लक्ष्मी युक्त है। अरिहंत भगवान की दिव्य ध्वनि से धर्म बरसता है, पुण्य भी लक्ष्मी है। सभी को आत्मिक परिणाम ठीक रखना चाहिए।

संसारी प्राणी पाप को छोड़ेगा, तभी सुख मिलेगा

आचार्यश्री ने कहा कि घर में अशुद्धता होने से आप दुखी और कष्ट में है, संसारी प्राणी पाप को छोड़ेगा, तभी सुख मिलेगा संसार में हर वस्तु नश्वर है। पुण्य पाप के अनुसार ही आयु गति शरीर मिलता है जीवन का सार धर्म है आजकल का ज्वलंत विषय साइबर क्राइम पर भी बताया कि लालच के कारण ही साइबर क्राइम होते हैं। भोजन करते समय बच्चे जब मोबाइल और टीवी चलाते हैं, जब हम उन्हें मना करते हैं तो कहते हमारे परिवार में बड़े भी मोबाइल टीवी देखकर भोजन करते हैं। संसार में धर्म के अलावा कोई शरणभूत नहीं है संसार में सुख धर्म की शरण में जाने से मिलेगा सभी को धर्म अपना कर जीवन में अनुपम सुख प्राप्त करने का पुरुषार्थ करना चाहिए।

कल 7 दीक्षा के दृश्य देखे

डॉ. राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री महायश मति ने उपदेश में बताया कि कल 7 दीक्षा के दृश्य आपने देखे, कल तक जो श्रावक-श्राविका आपके साथ नीचे बैठकर धर्म श्रवण करते थे, आज मंच पर साधु परमेष्ठी भगवान बन गए हैं। माताजी ने प्रवचन में आगे बताया कि आपके घरों में रजस्वला मासिक धर्म में महिलाएं शुद्धता नहीं रखती है, वह भोजन बनाती है, पुरुष भी भोजन करते हैं उनके द्वारा इस स्पर्शित कपड़े पहन कर आप मंदिर जाते हैं, गुरु को स्पर्श करते हैं इन सब कार्यों से अत्यधिक पाप का कार्य करते हैं।

अधर्म के कर्म जब उदय में आते हैं, तब आपको दुख मिलता है

जन्म मरण सूतक पातक सुआ लगने पर भी आप मंदिर के भीतर प्रवेश करते हैं। पूजन करने वाले, दर्शन करने वाले श्रावकों को आप स्पर्श छूते हैं। यह सब अधर्म के कर्म जब उदय में आते हैं, तब आपको दुख ही दुख मिलता है। तब दिन भर मंदिर के दर्शन, अभिषेक स्वाध्याय तप उपवास की क्रिया भी उन पाप कर्मों के उदय में आने से व्यर्थ हो जाती है, माता जी ने सभी महिलाओं को मासिक धर्म की अशुद्धता की तीन दिनों की स्थिति में परिवार में मर्यादा रखने की प्रेरणा देकर संकल्पित कराया। जिससे धर्म और संस्कृति की रक्षा हो सके।

प्रथम पड़गाहन एवं आहार देखने के लिए उमड़े श्रद्धालु

पवन मोदी एवं अनुभव जैन ने बताया कि प्रतिदिन आचार्य संघ सानिध्य में प्रवचन धार्मिक संस्कार शिविर स्वाध्याय एवं शाम को आरती आदि धार्मिक अनुष्ठान में काफी संख्या में धर्मलाभ किया जाता है। नव दीक्षित मुनिराज श्री तत्व सागर, श्री तप सागर, श्री प्रभाष सागर, नूतन आर्यिका श्री सौम्य मति, श्री प्रतिभा मति, श्री सुदृष्टि मति एवं क्षुल्लक श्री उदित सागर जी की दीक्षा के उपवास के बाद प्रथम पड़गाहन एवं आहार देखने के लिए सैकड़ों नर नारी उपस्थित रहे।