इंदौर। छत्रपति नगर स्थित दलाल बाग में सुधा समवशरण पांडाल में शुक्रवार को धर्म और आध्यात्म की धारा में श्रावक-श्राविकाओं ने खूब गोते लगाए। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि दुनिया में हर कार्य सफलता के लिए है। दुनिया में कोई भी कार्य विफलता के लिए नहीं है। विफलता दृष्टि का दोष है। वस्तु तो धर्मत्व है। मुनिश्री ने कहा कि सूर्य के सामने अंधकार टिक नहीं पाता है। धर्म विफलता का नाम नहीं सफलता का नाम है। धर्म सुख देता है। विफलता दुख देती है। धर्म हमें पॉजिटिविटी सिखाता है। पॉजिटिव सोच यह है कि दुनिया में कोई विफलता नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें मरने का डर है। विफलता का डर है। रास्ते पर गिरने का डर है, लेकिन रास्ता तो मंजिल तक पहुंचाता है। हमने एक्सीडेंट के लिए रास्ते को दोष देना आरंभ कर दिया है। आखिर कौन है। उस कौन को पहचान है। कौन है अदृश्य भूत है। इस देश में अदृश्य शक्ति का भय है। इस भय को दूर करने के लिए कौन को तलाश करना ही होगा। गुरु के अभाव में शिष्य अनाथ, भगवान के अभाव में भक्त अनाथ। गुरु हो तो उस कौन को पहचान सकते हैं। मुनिश्री ने कहा कि दुनिया में तीन लोग बहुत खतरनाक होते हैं। इसमें राय देने वाले भी खतरनाक है। उन्होंने भक्त मीरा का जहर पीने का प्रसंग सुनाया।
कार्यक्रम में इन्होंने पाद प्रक्षालन किया
न्यायमूर्ति मुंबई कैलाशचंद उत्तमचंद चांदीवाल, सरोज चांदीवाल, इक्कल करंजी से गुलाबचंद पाटनी, चैनकंवर पाटनी, ऋषभ प्रभात पाटनी, बीना कासलीवाल, ओमप्रकाश जैन, मोहिताश जैन, अद्विक जैन आगरा परिवार, नेमीचंद रेखा जैन, स्वाति अनुष्का जैन आदि ने भक्ति कलश लेकर मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया। इस अवसर पर सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, महामंत्री हर्ष जैन, विश्व जैन संगठन के मयंक जैन भी मौजूद रहे। मंगलाचरण उदासीन आश्रम की बहनों ने प्रस्तुत किया। संचालन सविता बड़जात्या, अर्पित वाणी जैन ने किया। इस अवसर पर दीप प्रज्वलन करने के लिए जैनम ग्रुप के सदस्य भी मौजूद रहे।



