धरियावद। परम पूज्य आचार्य कल्प पुण्यसागर जी महाराज के 62वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में श्री दिगंबर जैन समाज द्वारा तीन दिवसीय अवतरण दिवस समारोह श्रद्धा, भक्ति और धर्मप्रभावना के साथ आयोजित किया जा रहा है। समारोह के अंतर्गत विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं।

प्रथम दिन महामस्तकाभिषेक और सहस्र पुष्प वंदना

समारोह के प्रथम दिन महावीर मंदिर के मूलनायक भगवान महावीर स्वामी का विभिन्न द्रव्यों एवं कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। इसके पश्चात 1008 सहस्र पुष्पों से भगवान की वंदना हुई।

संध्याकाल में विनयांजलि सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिसमें श्रद्धालुओं ने गुरुवर के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

64 जोड़ों ने किया महावीर विधान

समारोह के दूसरे दिन 14 अक्टूबर को महावीर वाटिका स्थित पुण्यसागर सभागार में 64 जोड़ों ने भगवान महावीर स्वामी की आराधना करते हुए महावीर विधान संपन्न किया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ अर्घ्य समर्पित किए।

इस अवसर पर संघस्थ साधु-संतों ने गुरुवर के प्रति विनयांजलि अर्पित की। संध्या में स्थानीय कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें रचनाओं के माध्यम से गुरु भक्ति एवं धर्मप्रभावना का संदेश दिया जाएगा।

15 अक्टूबर को 62वां अवतरण दिवस

15 अक्टूबर को आचार्य श्री कल्प पुण्यसागर जी महाराज का 62वां अवतरण दिवस श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्रातः गुरुदेव का पूजन तथा विनयांजलि सभा आयोजित होगी।

अवतरण दिवस पर प्रातः 11 बजे कन्हैयालाल जी-संजय कुमार जी अणदावत परिवार की ओर से स्वामी वात्सल्य भोज आयोजित किया जाएगा। विभिन्न गांवों एवं शहरों से श्रद्धालुओं का धरियावद पहुंचने का क्रम जारी है।

22 वर्ष की आयु में ग्रहण की दीक्षा

आचार्य कल्प पुण्यसागर जी महाराज का जन्म मध्यप्रदेश के थांदला गांव में हुआ। बाल्यकाल से ही उनकी धर्म एवं अध्यात्म में विशेष रुचि रही। उन्होंने 22 वर्ष की आयु में आचार्य अजितसागर जी महाराज से दीक्षा ग्रहण कर संयम मार्ग अपनाया।

वर्तमान में वे आचार्य वर्धमानसागर जी महाराज के संघस्थ शिष्य के रूप में धर्मप्रभावना कर रहे हैं। धरियावद में उनके 20 पिच्छी संघ के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और साधना के कार्यक्रम चल रहे हैं।

श्रीफल साथी : अशोक कुमार जेतावत