दिल्ली। चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के जीवनोद्धारक हस्त कमलों से दिल्ली की राधापुरी निवासी वयोवृद्ध मगनमला देवी ने जीवन के आखिरी पड़ाव में घर, गृहस्थी व हॉस्पिटल सबका त्याग कर गुरु शरण में 8 जून को जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की।

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दीक्षा के बाद उनका नाम आर्यिका श्री जागृतमति माताजी रखा गया। पूज्या आर्यिका श्री जागृतमति माताजी आचार्य श्री सुनील सागर जी गुरुराज के कुशल निर्देशन व श्री संघ की निश्रा में समाधि साधना की ओर अग्रसर हैं।