इंदौर। प्राकृताचार्य,बहुभाषाविद्, चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के 49वें जन्म महोत्सव के पावन अवसर पर भारतीय डाक विभाग द्वारा एक विशेष आवरण जारी किया। जिसका लोकार्पण आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के सानिध्य में चल रहे प्राकृत सम्मान समारोह के अन्तर्गत भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा एवं श्रुत संवर्ध्दनी महासभा द्वारा किया गया। विमोचन कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष टीके वेद, प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र कुमार सेठी, श्रुत संवर्ध्दनी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं चातुर्मास कमेटी के प्रमुख इंद्रकुमार सेठी, पुरातत्व संयोजक एवं सिनियर फिलेटेलिस्ट ओम पाटोदी, विशेष आवरण जारी करवाने में महती भूमिका निभाने वाले जयंत डोसी प्रमुख रूप से उपस्थित थे। विशेष आवरण जारी करवाने में श्रुत संवर्ध्दनी महासभा के चिराग जैन, डीके जैन, तीर्थ संरक्षिणी महासभा के कैलाश लुहाड़िया, तल्लीन बड़जात्या, राकेश पाटनी, पवन पाटोदी का भी विशेष सहयोग रहा ।
प्राचीन तीर्थ, पवित्र गुफाएं, शास्त्र, शिलालेख के रूप परिवर्तन नहीं होना चाहिए
इस अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि हमारे प्राचीन तीर्थ, पवित्र गुफाएं, शास्त्र, शिलालेख के रूप परिवर्तन नहीं होना चाहिए क्योंकि रूप परिवर्तन से धर्म संस्कृति का नुक़सान बाद में होगा देश का नुक़सान पहले होता है। कैलाश विजयवर्गीय केबिनेट मंत्री ने अपनी बात रखते हुए कहा कि गुरुदेव जो अद्भुत कार्य हमारी प्राचीन भाषा और लिपि के संवर्धन के लिए कर रहे हैं वह अनुकरणीय है।हमारे पूर्वजों की सबसे प्राचीन लिपि ब्राम्ही और भाषा प्राकृत है। भारतीय मुद्रा पर प्राकृत भाषा और ब्राम्ही लिपि का प्रयोग हो ऐसी गुरुदेव की भावना है। मैं इसके लिए पूरा प्रयास करुंगा कि यह भावना पुर्ण हो। यह जानकारी वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने दी।




