सागर। बुंदेलखंड के लघु सम्मेद शिखर कहे जाने वाले सिद्धक्षेत्र द्रोणागिरी में श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट द्वारा 108 फीट ऊंचे सहस्रकूट जिनालय का निर्माण कराया जा रहा है। परम पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज की प्रेरणा से निर्माणाधीन जिनालय का कार्य अब पूर्णता की ओर है।

1008 प्रतिमाओं से सजेगा भव्य जिनालय

सहस्रकूट जिनालय में 1008 प्रतिमाएं विराजमान की जाएंगी। इसके साथ ही 108 बड़ी प्रतिमाओं की भी स्थापना होगी। बुंदेलखंड के मध्य बनने वाला यह भव्य जिनालय धार्मिक एवं स्थापत्य की दृष्टि से विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है।

पंचकल्याणक को लेकर हुई बैठक

जिनालय के पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियों को लेकर उदासीन आश्रम में प्रबंध समिति की आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रबंध समिति अध्यक्ष संतोष जैन घड़ी ने की। बैठक में आगामी समय में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सान्निध्य में पंचकल्याणक सम्पन्न कराने को लेकर चर्चा की गई।

6 सितंबर को आचार्य श्री को समर्पित होगा श्रीफल

समिति द्वारा 6 सितंबर को ऋषभ विहार, दिल्ली में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सान्निध्य में पहुंचकर श्रीफल समर्पित किया जाएगा। इस अवसर पर पंचकल्याणक महोत्सव के लिए आचार्य श्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया जाएगा। बैठक का संचालन मुन्नालाल जैन एवं मंत्री गजेंद्र जैन ने किया।

सौ वर्ष से धर्म प्रभावना का केंद्र

प्रचार मंत्री द्वय प्रकाश अदावन एवं मनीष विद्यार्थी ने बताया कि सिद्धक्षेत्र द्रोणागिरी में स्थित उदासीन आश्रम दो नदियों के बीच प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर आत्मसाधना का केंद्र है। आश्रम विगत 100 वर्षों से धर्म प्रभावना के कार्य में सक्रिय है। सहस्रकूट जिनालय का निर्माण पूर्ण होने के बाद क्षेत्र का धार्मिक वातावरण और अधिक प्रभावशाली होगा।

अतिशयकारी कुएं के जल का उल्लेख

आश्रम अध्यक्ष भागचंद जैन पीलीदुकान ने बताया कि आश्रम के कुएं के जल का विशेष धार्मिक एवं अतिशयकारी महत्व माना जाता है। नदी के तट पर स्थित आश्रम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और भव्यता के कारण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

मुनियों की साधना से पावन भूमि

उन्होंने बताया कि यह पावन भूमि वरदत्तादि मुनियों की साधना एवं निर्वाण से जुड़ी रही है। ऐसे सिद्ध एवं पवित्र स्थान पर सहस्रकूट जिनालय और उदासीन आश्रम का शांत वातावरण आत्मसाधना के अनुपम केंद्र के रूप में विकसित होगा। क्षेत्र में प्रवाहित कॉटन नदी भी इस प्राकृतिक परिवेश की विशेषता है।

बैठक में समाजजनों की सहभागिता

बैठक में शिखर चंद जैन, शिवप्रसाद जैन, जिनेंद्र रामटोरिया, कमल डेवडिया, प्रेमचंद बरेठी, वीरेंद्र जैन शिक्षक, राजकुमार जैन गुढा, मनोज जैन, राजेंद्र जैन मंडी सहित अन्य समाजजन उपस्थित रहे।