अयोध्या। श्री दिगंबर जैन मंदिर रायगंज में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। सुदूरवर्ती प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में निर्वाण लाड़ू समर्पित कर पूजा-अर्चना की।
सम्मेद शिखर की रचना कर चढ़ाया निर्वाण लाड़ू
गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में सम्मेद शिखर की रचना तैयार की गई। निर्वाणकांड का पाठ करते हुए भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में निर्वाण लाड़ू समर्पित किया गया। प्रतिष्ठाचार्य श्री विजय कुमार जैन को इस धार्मिक अनुष्ठान में निर्वाण लाड़ू समर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ ने झारखंड स्थित सम्मेद शिखर की पावन धरा पर स्वर्णभद्र कूट से निर्वाण प्राप्त किया था। इसी भावना से श्रद्धालु आज भी सम्मेद शिखर पहुंचकर निर्वाण लाड़ू समर्पित करते हैं।
भगवान पार्श्वनाथ क्षमा के अवतार
पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ के जीवन चरित्र से हम सभी को सीखना चाहिए कि जीवन में क्षमा को किस प्रकार धारण किया जा सकता है। भगवान पार्श्वनाथ का जीवन अत्यंत मार्मिक, आदर्श एवं क्षमाशील रहा है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति को क्षमा और संयम का भाव अपने जीवन में उतारना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ के प्रति श्रद्धा का प्रमुख कारण उनका आदर्श जीवन और क्षमाशील व्यक्तित्व भी है। देशभर में भगवान पार्श्वनाथ के अनेक मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
अभिषेक, शांतिधारा और इंद्रध्वज महोत्सव
प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने मंत्रोच्चारणपूर्वक भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण लाड़ू समर्पित करवाया। इसके बाद भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। देश के विभिन्न प्रांतों से आए भक्तों ने पूजन एवं अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त किया।
मध्याह्न में इंद्रध्वज महोत्सव के अंतर्गत 20 नंबर की जयमाला का वाचन किया गया। शिर्डी, टिवैâतनगर, जयपुर सहित विभिन्न स्थानों के भक्त पारस चैनल के माध्यम से जुड़े और अर्घ्य समर्पित किए।
विजय कुमार जैन को जन्मदिवस पर आशीर्वाद
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के मंत्री श्री विजय कुमार जैन को जन्मदिवस के अवसर पर पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। माताजी ने उन्हें ग्रंथ प्रदान किया।
जैन मंदिर धर्म तीर्थ के पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने तिलक एवं माल्यार्पण कर जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने प्रतीक चिह्न प्रदान कर आशीर्वाद दिया। डॉ. जीवन प्रकाश जैन एवं मंदिर के कार्यकर्ताओं ने भी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
पीठाधीश के निर्देशन में संपन्न हुआ आयोजन
सम्पूर्ण कार्यक्रम जैन मंदिर के पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की।
1008 दीपकों से हुई मंगल आरती
संध्याकाल भगवान पार्श्वनाथ की भव्य मंगल आरती 1008 दीपकों से संपन्न की गई। दीपों की रोशनी और भक्तिभाव से मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में श्रद्धा समर्पित कर परिवार एवं समाज के मंगल की भावना व्यक्त की।



