देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व के अवसर पर श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने मोक्षमार्ग, गुप्ति, सम्यक्त्व, निर्जरा और निष्काम धर्म का गहन विवेचन किया। श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में उपस्थित होकर आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त की। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।
देहरा तिजारा (अलवर)। पावन अष्टानिका महापर्व के अवसर पर अतिशय क्षेत्र श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित विशाल धर्मसभा में जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, परम पूज्य भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने महाकाव्य "जीवन है पानी की बूँद" के माध्यम से मोक्षमार्ग पर अत्यंत गूढ़ एवं प्रेरणादायी प्रवचन प्रदान किए।गुप्ति ही बनती है निर्जरा का साधन
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि यदि कोई जीव सच्चे भाव से मोक्ष की कामना करते हुए मन, वचन एवं काया की गुप्ति का आश्रय लेता है, तो वही गुप्ति नए कर्मबंध का कारण न बनकर पूर्व संचित कर्मों की निर्जरा का साधन बन जाती है। सम्यग्दृष्टि की धर्मक्रियाएँ मुख्यतः आत्मशुद्धि और निर्जरा का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
निष्काम धर्म ही वास्तविक साधनागुरुदेव ने कहा कि सम्यग्दृष्टि धर्म का पालन फल, यश अथवा पुण्य की इच्छा से नहीं करता। वह धर्म में प्रवृत्त रहते हुए भी भीतर से राग-द्वेष रहित और उदासीन रहता है। यही निष्काम भावना मोक्षमार्ग की वास्तविक साधना है।
पुण्य का महत्व और अंतिम लक्ष्यप्रवचन के दौरान पुण्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने कहा कि शुभ पुण्य आत्मा को धर्म, संयम और सम्यक्त्व के अनुकूल अवसर प्रदान करता है, किन्तु साधक का अंतिम लक्ष्य पुण्य और पाप—दोनों कर्मों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करना होना चाहिए।
आत्मशुद्धि का संदेशउन्होंने बताया कि उत्कृष्ट शुभ पुण्य के उदय से चक्रवर्ती पद प्राप्त होता है, जबकि हिंसा, क्रोध, मान, माया, लोभ और घोर पाप कर्म नरक गति का कारण बनते हैं। प्रत्येक जीव को शुभ परिणामों के साथ आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।
समाजजनों की रही सक्रिय सहभागिताधर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के मंगल प्रवचनों का श्रवण कर आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त की तथा भगवान श्री 1008 चन्द्रप्रभु जिनेन्द्र भगवान के श्रीचरणों में वंदन कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस अवसर पर देहरा जैन मंदिर समिति एवं चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, नरेंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, निर्मल जैन, सचिन जैन, अमन जैन, बाबूलाल जैन, संदीप जैन एवं शिभू जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।




