अंबाह। जैन बगीची परिसर में मुन्नालाल जैन एवं पंकज जैन परिवार की ओर से आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में धार्मिक पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अवसर पर नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शोभायात्रा के दौरान पूरा नगर धार्मिक जयघोष से गूंज उठा।
नगर में निकली भव्य शोभायात्रा
शोभायात्रा में सुसज्जित बग्घी में श्रीमती बबीता जैन एवं मुन्नालाल जैन सवार हुए। शोभायात्रा नगर के बाजार एवं प्रमुख मार्गों से होती हुई जैन बगीची परिसर पहुंची। यहां इंद्र के स्वरूप में भगवान के दरबार में पहुंचकर आरती की गई। इसके बाद विधि-विधान के साथ धार्मिक पाठ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना कर परिवार एवं समाज के मंगल की कामना की।
धर्म से आत्मकल्याण का मार्ग मिलता है : संगममति माताजी
आर्यिका संगममति माताजी ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं में व्यतीत करने के बजाय आत्मकल्याण के लिए उपयोग करना चाहिए। धार्मिक आयोजन तभी सार्थक हैं, जब उनके माध्यम से जीवन में संयम, सदाचार, अहिंसा और त्याग के भाव उत्पन्न हों। भगवान की भक्ति के साथ उनके बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची आराधना है।
माताजी ने कहा कि बाहरी आडंबर से अधिक महत्वपूर्ण मन की शुद्धता है। व्यक्ति को अपने भीतर के विकारों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। धर्म हमें किसी दूसरे को बदलने से पहले स्वयं को बदलने की प्रेरणा देता है।
धार्मिक आयोजन संस्कारों को मजबूत करते हैं : जिनेश जैन
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि जैन समाज की धार्मिक परंपराएं हमारी संस्कृति और संस्कारों की पहचान हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार और अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। संगममति माताजी का सान्निध्य समाज के लिए सौभाग्य की बात है। उनके प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने मुन्नालाल जैन एवं पंकज जैन परिवार को धार्मिक आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज में इसी प्रकार धर्म और संस्कारों से जुड़े आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए।
श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जिनेश जैन सहित समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक पाठ एवं आराधना के पश्चात श्रद्धालुओं ने आर्यिका संगममति माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म और संस्कारों से जुड़े रहने की प्रेरणा ली।



