भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर जैन बगीची में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन के प्रारंभ में कुमारी मोनी जैन ने मंगलाचरण स्वरूप भक्ति नृत्य की प्रस्तुति दीं। इस अवसर पर कवियों ने खूब तालियां बटोरीं। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट...
अम्बाह/ मुरेना। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जन्मकल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर जैन बगीची में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन के प्रारंभ में कुमारी मोनी जैन ने मंगलाचरण स्वरूप भक्ति नृत्य की प्रस्तुति दीं। आए हुए अतिथियों ने चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया। अम्बाह जैन समाज के अध्यक्ष एवं अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन, राकेश भण्डारी, अजय जैन पत्रकार, विमल जैन राजू, कुलदीप जैन, पंकज जैन पत्रकार, अतुल जैन, दिनेश जैन, मनोज नायक ने सभी आमंत्रित कवियों का स्वागत सम्मान किया। कवि सम्मेलन का संचालन जैन दर्शन के प्रसिद्ध गीतकार शहनाज हिंदुस्तानी दिल्ली ने किया।कवि सम्मेलन के प्रारम्भ में आगरा से पधारी नेत्रहीन कवयित्री आरफा शबनम ने महावीर की वन्दना पढ़ते हुए कहा-

बताते हैं तुम्हें दोस्तों, हम क्या देख पाते हैं , अंधेरे में रोशनी के दीपक जगमगाते हैं। तुम अपनी आंख में रंगीनियाँ देखो जमाने की, हमारी बंद आंखों में, महावीर नजर आते हैं।

अतिशय क्षेत्र तिजारा से पधारे जैन दर्शन के सुविख्यात कवि डॉ. कमलेश बसन्त ने जैन भक्ति से ओतप्रोत काव्य पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने सम्मेद शिखरजी पर काव्यपाठ करते हुए कहा कि

हम कम हैं पर कमजोर नहीं, कोई चाल नहीं चलने देंगे । तीर्थराज को शिमला नैनीताल नहीं बनने देंगे ।। तुगलुकी तुम्हारे फरमानों की, दाल नहीं गलने देंगे । मौज और मस्ती की वहां, तिरपाल नहीं तनने देंगे ।

दिल्ली से आये हुये कवि शहनाज हिंदुस्तानी ने भगवान महावीर पर काव्य पाठ करते हुए कहा कि-

भगवान महावीर तू महान है, बुद्धिजीवीयों के लिए वरदान हैं । अज्ञान के लिए ज्ञान की तू खान हैं, इसीलिए तेरा नाम वर्धमान हैं । तुझको पाना सबसे बड़ा अनुदान हैं, दुनियां में जैन धर्म की तू जान हैं । भगवान महावीर तू महान हैं । अलीगढ़ से पधारे वीर रस के ओजस्वी कवि

शिवमकुमार आजाद ने देश प्रेम पर काव्य पाठ करते हुए कहा कि-

मेरे देश की शरहदों का सिपाही, उठा शीश दुश्मनों से ये कह रहा है । तुम्हारे वतन में लहू बह रहा है, हमारे लहू में वतन बह रहा है।

इसके साथ ही मारूति नन्दन जयपुर, महेश जैन विकल अम्बाह, वर्षा जैन ने अपने सुंदर काव्य पाठ से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पूरे कवि सम्मेलन में डॉ. कमलेश बसन्त तिजारा और कवि सम्मेलन संचालक शहनाज हिदुस्तानी ने खूब तालियां बटोरीं। यहां यह बताना भी जरूरी है कि शहनाज हिंदुस्तानी एक मुस्लिम होते हुए भी जैन दर्शन पर अपनी अच्छी पकड़ रखते हैं। कवि सम्मेलन में देर रात तक रुककर सभी श्रोताओं ने काव्य पाठ का भरपूर आनंद लिया।