अडिन्दा पार्श्वनाथ। 1500 वर्ष प्राचीन परम चमत्कारी भगवान अडिन्दा पार्श्वनाथ की पावन धरा पर 42वें अभिनंदनीय वर्षा योग के लिए ससंघ विराजमान गणिनी श्री सुभूषण मति माताजी के पावन सानिध्य में शिक्षक दिवस’ पर शिक्षक सम्मेलन व सम्मान समारोह संपन्न हुआ। दीक्षा के पूर्व एमए बीएड तक लौकिक शिक्षा पूर्ण कर दो वर्ष तक शिक्षक का कार्य करने वाली गणिनी आर्यिका श्री ने दूर-दूर से पधारे शिक्षक समूह को संबोधित करते हुए कहा कि जिंदगी जीने वाले पशु-पक्षी आदि सभी प्राणी है लेकिन मन, बुद्धि से युक्त मनुष्य भावात्मक संबंध जोड़ता है। इसी से गुरु शिष्य का संबंध बना है। गुरु ना हो तो जीवन अधूरा है। गुरु बिना जीवन शुरू नहीं। अपनी संतान को प्यार देना सरल है परंतु दूसरे की संतान को प्यार से नियंत्रण में रखना बहुत कठिन है। उन्होंने कहा कि आजकल अपनी एक-दो संतान को संभालना कठिन है। वहां शिक्षक अलग-अलग परिवारों के अनेक बच्चों की एक साथ देखभाल करके अच्छा इंसान बनाता है। इसीलिए शिक्षक बनना बड़ा संघर्षमय है। सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करता है परंतु शिक्षक हमारे भविष्य की रक्षा करता है।

गुरु मां ने आदर्श शिक्षक के लिए सूत्र दिए

केवल पास होने के लिए शिक्षा नहीं अपितु भावी नागरिक तैयार करने का उद्देश्य रखें ।’शिक्षा का व्यवसायीकरण न करें। शिक्षक वह आईना होता है जो एक नया रूप देता है समाज को नई दिशा दे सकता है तो शिक्षक शिक्षा के द्वारा ऐसी ऊर्जा का संप्रेषण हो कि विद्यार्थी में नैतिकता आए देश सेवा परिवार में प्रेम दया का प्रस्फुटित होना चाहिए। संस्कारों को फलीभूत करने का काम है शिक्षक का मन संस्कारों का बीजारोपण करती है तो शिक्षक उसमें फल फूल लगता है। मां खून से संबंध से अपनी संतान को पालती है। तो शिक्षक नैतिकता के संबंध से विद्यार्थी का जीवन संवारते है।

गुरु मां ने हत्वपूर्ण विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया

एक बात और ध्यान रखना, यदि हमारी भाषा नष्ट हो जाएगी तो संस्कृति भी नष्ट हो जाएगी’ रिश्तो की अहमियत नहीं बचेगी इसलिए ’राष्ट्र को बचाना है तो अपनी संस्कृति को बचाना होगा अपनी भाषा का संरक्षण करना होगा। विचारों की पवित्रता, आहार की पवित्रता, समय की पाबंदी, स्वावलंबी जीवन, सात्विक प्रवृत्ति आदि भारतीय संस्कृति का संरक्षण की कीजिए। याद रखना, डॉक्टर वकील सुधारने पर भी देश नहीं सुधरेगा क्योंकि, उनके पास सूखे वृक्ष जाते हैं परंतु शिक्षक आदर्श है तो राम राज्य कहीं दूर नहीं।

शिक्षक आदर्श जीवन का सूत्र है

हीरे को तराशने से भी अधिक महत्वपूर्ण है विद्यार्थी को तराशना।मकान बनाने के लिए इंजीनियर चाहिए तो जीवन बनाने के लिए शिक्षक चाहिए। शिक्षक आदर्श जीवन का सूत्र है। इस सम्मेलन व सम्मान समारोह में जिला अध्यक्ष व संभाग प्रभारी की भी गौरवमय उपस्थिति रही । सभी गुरु भक्तों ने गणिनी गुरु का पाद प्रक्षालन कर अर्ध्य समर्पित किया। गुरु माँ ने स्वयं के भीतर उपस्थित शिक्षक की भूमिका को जागृत करते हुए एक आदर्श शिक्षक की भूमिका का वर्णन किया जो आने वाले समय के लिए भी पथ प्रदर्शक रहेगा। सभी भक्तों ने गुरु मां के चरणों में ’वन्दामी वन्दामी वन्दामी’ करते उज्जवल भविष्य के सपने संजोए गुरु के महत्व को अंगीकार करते हुए नीचे धाम को प्रस्थित हुए।