आचार्य विशुद्ध सागर जी ससंघ के पथरिया की ओर बढते कदम: पथरिया में होने जा रहा है आचार्यश्री का चातुर्मास

पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का पथरिया की ओर विहार चल रहा हैं। इसी दौरान आचायश्री के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागरजी के प्रवचन भी हो रहे हैं। उनके प्रवचनों का लाभ क्षेत्रीय दिगंबर जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में ले रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर...
पथरिया। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का पथरिया की ओर विहार चल रहा हैं। इसी दौरान आचायश्री के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज जी के प्रवचन भी हो रहे हैं। उनके प्रवचनों का लाभ क्षेत्रीय दिगंबर जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में ले रहे हैं। इस दौरान मुनिश्री ने प्रवचन में कहा कि ज़िन्दगी में जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है रोशनी होती है, खुशियां होती हैं, तब हमारे साथ बहुत से लोग होते हैं। दोस्त, रिश्तेदार, सहयोगी सब आसपास नज़र आते हैं लेकिन, जैसे ही जीवन में अंधेरा आता है, जैसे ही कठिनाइयां सामने आती हैं, तब बहुत से लोग धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं। उजालों में तो हर कोई साथ देता है। पर सच्चा साथी कौन है? वो जो आपके साथ अंधेरों में खड़ा रहता है, जब आपको उसकी सबसे अधिक ज़रूरत होती है। इसलिए ज़िन्दगी में संबंधों का चुनाव करते समय इस बात पर ध्यान दीजिए।बाहरी रोशनी की तलाश में मत भटको जो लोग सिर्फ आपके सुख में साथ हों, वो साथी नहीं हैं; सच्चे साथी वे हैं, जो आपके दुःख में भी आपका हाथ थामे रहें। कभी-कभी ये साथी कोई दोस्त हो सकता है, कोई गुरु हो सकता है या आपकी अंतरात्मा भी हो सकती है। इसीलिए बाहरी रोशनी की तलाश में मत भटको। उस इंसान की तलाश करो, या उस शक्ति से जुड़ो, जो अंधेरे में भी आपकी रोशनी बन जाए और अंत में यही कहूंगा कि खुद भी ऐसा बनने की कोशिश करो, जो किसी और की ज़िन्दगी में उजाले का नहीं, अंधेरे में सहारा बनने वाला हो क्योंकि, अंधेरे में दिया जलाना ही सच्चा प्रेम, सच्ची दोस्ती और सच्ची इंसानियत है।
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