चौरई। मुकुट सप्तमी के पावन अवसर पर श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में 24 घंटे के अखंड सामूहिक जाप ने धार्मिक एवं सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। यह संपूर्ण आयोजन मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की मंगल प्रेरणा, निर्देशन, मार्गदर्शन एवं उपदेशों के फलस्वरूप तथा उनके मंगल आशीर्वाद की भावना से हुआ। उनकी धार्मिक प्रेरणा एवं जाप-साधना के संदेश को आत्मसात करते हुए संपूर्ण समाज ने एकजुट होकर इस विराट धार्मिक आयोजन को सफल बनाया। 19 अगस्त बुधवार को प्रातः 6 से 20 अगस्त प्रातः 6 बजे तक चले इस आयोजन में संपूर्ण जैन समाज ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए 21 हजार जाप के सामूहिक संकल्प को अभूतपूर्व रूप प्रदान किया। दिनभर माताओं-बहनों, महिला मंडल, बालिकाओं एवं वरिष्ठजनों ने जाप की जिम्मेदारी संभाली, वहीं रात्रि 12 बजे से प्रातः तक युवा एवं पुरुष वर्ग ने जागरण करते हुए अखंड जाप को निरंतर बनाए रखा।

इन्होंने रात में किया जाप

रात्रिकालीन जाप में विशेष रूप से रिंकू जैन, अश्विनी जैन, वैभव सिंघई, तारण जैन, पीयूष गंगवाल, अतुल सिंघई, अमित सिंघई, विजय सिंघई, अशोक सिंघई सहित अनेक श्रद्धालुओं ने पूरी रात जागकर जाप में सहभागिता की। वहीं आनंद सिंघई, राखी सिंघई सहित सिंघई परिवार के अनेक सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं एवं जाप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वरिष्ठजनों और महिलाओं की विशेष सहभागिता

आयोजन की विशेष बात यह रही कि वरिष्ठ नागरिकों एवं महिलाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ घंटों बैठकर जाप किया। अनेक माताएं-बहनें अपनी दैनिक दिनचर्या को छोड़कर लंबे समय तक मंदिर में बैठीं और सामूहिक साधना में सहभागी बनीं। कई श्रद्धालुओं ने अपनी क्षमता के अनुसार जाप किया। अनेक साधकों ने 100 से अधिक तथा कुछ श्रद्धालुओं ने 200 से अधिक जाप कर सामूहिक संकल्प को नई ऊंचाई प्रदान की। पाठशाला के बच्चों एवं बालिका मंडल ने भी आयोजन में विशेष उत्साह दिखाया। दोपहर, शाम एवं रात्रि में बड़ी संख्या में बच्चे मंदिर पहुंचे और सामूहिक जाप में सहभागी बने।

भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर हुआ महामस्तकाभिषेक

19 अगस्त की प्रातः भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। महामस्तकाभिषेक में 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। शांतिधारा के समय मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। शांतिधारा की बोलियों में नीरज जैन एवं धीरज जैन, लक्ष्मी डिपार्टमेंटल परिवार, अनिल जैन, विद्यासागर सेल्स तथा जितेंद्र जैन एवं धर्मेंद्र जैन, पार्श्वनाथ ट्रेडर्स ने सहभागिता की। पार्श्वनाथ ट्रेडर्स परिवार ने अपने पुत्र वेदांश के जन्मदिन के अवसर पर शांतिधारा की बोली लेकर धार्मिक भावना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। सभी श्रद्धालुओं ने अपने घरों से तैयार करके लाए निर्वाण लाडू भगवान पार्श्वनाथ स्वामी को समर्पित किए।

कलश स्थापना से प्रारंभ हुआ 24 घंटे का अखंड जाप

प्रातः लगभग 6.30 से 6.45 बजे जाप के कलश की स्थापना कर 21 हजार जाप के सामूहिक संकल्प का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर विजय सिंघई, अतुल सिंघई, अमित सिंघई, आनंद सिंघई एवं आकाश जैन शास्त्री ने जाप का संकल्प लिया। दीपक जैन (टेंट हाउस) ने भी प्रारंभिक व्यवस्था में सहयोग किया। इसके बाद जाप का क्रम लगातार 24 घंटे चलता रहा और मंदिर परिसर में जाप की ध्वनि निरंतर गूंजती रही।

यू-ट्यूब लाइव से देश-विदेश तक पहुंचा जाप

आयोजन की विशेष उपलब्धि रही कि आकाश शास्त्री चिरगांव यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से पूरे 24 घंटे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया। इससे मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज एवं देश-विदेश में रहने वाले समाजजन भी ऑनलाइन जुड़कर जाप में सहभागी बन सके। कार्यक्रम में आकाश जैन शास्त्री, चिरगांव, झांसी ने जाप के आध्यात्मिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन परंपरा में जाप को अत्यंत प्रभावशाली साधना माना गया है। उन्होंने कहा कि पूजा कोटि समं स्तोत्रम स्तोत्र कोटि समं जपः। जप कोटि समं ध्यानम के माध्यम से जाप की महत्ता बताते हुए कहा कि जाप मन को शांत एवं एकाग्र करने, ध्यान की भावना विकसित करने तथा इच्छाशक्ति एवं मनोबल को मजबूत करने की साधना है। उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के आदर्शों को स्मरण करते हुए सभी से उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

24 घंटे बाद हुआ अखंड जाप का समापन

20 अगस्त को प्रातः लगभग 6.45-7 बजे 24 घंटे के अखंड जाप का समापन हुआ। जाप द्वारा अभिमंत्रित पवित्र वर्गणाओं को पूरे मंदिर परिसर में वितरित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस विराट धार्मिक साधना का सहभागी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया। आयोजन में रिंकू जैन, अश्विनी जैन, वैभव सिंघई, राखी सिंघई, तारण जैन, पीयूष गंगवाल, अतुल सिंघई, अमित सिंघई, विजय सिंघई, आनंद सिंघई, अशोक सिंघई सहित सिंघई परिवार, महिला मंडल, बालिका मंडल, पाठशाला के बच्चों, युवा वर्ग, वरिष्ठजनों एवं संपूर्ण जैन समाज ने महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई।

सामूहिक सहभागिता बनी आयोजन की सबसे बड़ी शक्ति

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पूरे समाज ने मिलकर 24 घंटे की जिम्मेदारी निभाई। महिलाओं ने दिनभर, युवाओं एवं पुरुषों ने रात्रि में, बच्चों एवं बालिकाओं ने दोपहर और शाम में तथा वरिष्ठजनों ने अपनी क्षमता के अनुसार घंटों जाप करते हुए इस संकल्प को शक्ति प्रदान की। मुकुट सप्तमी का यह आयोजन चौरई के धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में सामूहिकता, संगठन, तप और जाप-साधना का एक अत्यंत प्रभावशाली एवं स्मरणीय अध्याय बन गया।