तीर्थंकर ऋषभदेव का अनन्य अवदान: मानव जीवन को दीं बहत्तर कलाएँ :लेखन, संगीत, गणित से लेकर वास्तु, युद्ध और चिकित्सा तक — जीवन को व्यवस्थित बनाने की अद्भुत ज्ञान परंपरा
संवाददाता: Reporter: Shree Phal News•इंदौर•12/3/2026, 2:58:45 am
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने मानव समाज को व्यवस्थित जीवन जीने के लिए बहत्तर कलाओं का ज्ञान दिया। इन कलाओं में लेखन, संगीत, गणित, वास्तु, युद्ध, चिकित्सा और समाज व्यवस्था से जुड़े अनेक विषय शामिल हैं। संपादक रेखा जैन की विशेष प्रस्तुति
मुरैना के बड़े जैन मंदिर में आचार्यश्री उदारसागर महाराज ने धर्म को आत्मा का स्वाभाविक गुण बताते हुए सम्यक् दर्शन, ज्ञान और चरित्र को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने सांसारिक संबंधों को कर्मों के अधीन बताया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
इंदौर के मल्हारगंज स्थित बीसपंथी मंदिर में मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री विनय नंदी जी महाराज का चातुर्मास हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मुनिश्री ने धर्म को आचरण में उतारने का संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।