दिल्ली। सर्वोच्च जैन तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी की पवित्रता और धार्मिक स्वरूप की रक्षा के लिए विश्व जैन संगठन ने केंद्रीय वन मंत्रालय के 5 जनवरी 2023 के आदेश का सख्ती से अनुपालन कराने सहित विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन श्री निर्मल जैन को निवेदन दिया।

पर्वतराज की पवित्रता का मुद्द

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय जैन ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन श्री निर्मल जैन को पारसनाथ पर्वतराज पर गैर-धार्मिक गतिविधियों की प्रमाण सहित जानकारी दी। उन्होंने पर्वतराज की पवित्रता बनाए रखने के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा 5 जनवरी 2023 को जारी आदेश का सख्ती से अनुपालन कराने की अनुशंसा करने का निवेदन किया।

आयोग ने दिया कार्यवाही का आश्वासन

आयोग के चेयरमैन श्री निर्मल जैन ने संगठन की याचिका पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने पर्वतराज की पवित्रता के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय के आदेश और संगठन की सभी मांगों को आवश्यक बताते हुए याचिका को आवश्यक कार्यवाही के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय, अल्पसंख्यक मंत्रालय, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और झारखंड सरकार को अतिशीघ्र अनुशंसा किए जाने का आश्वासन दिया।

सुरक्षा और निगरानी की मांग

संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री श्री राहुल जैन ने प्रमुख मांगों की जानकारी दी। इनमें यात्रियों का पंजीकरण, प्रवेश द्वार पर स्कैनर सहित पुलिस चेक पोस्ट, सम्पूर्ण पर्वतराज क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे और सीआरपीएफ की एक कंपनी की नियुक्ति शामिल है।

इसके साथ ही पर्वतराज पर बाइक संचालन, नशा करने तथा फिल्मी गानों पर अश्लील वीडियो बनाने जैसी गतिविधियों पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने की मांग भी रखी गई।

गिरनार धर्म यात्रा की जानकारी

संगठन के सम्मानित सदस्य श्री वीरेंद्र जैन, नोएडा शाखा अध्यक्ष श्री के.के. जैन और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्री आकाश जैन ने संगठन द्वारा आयोजित गिरनार धर्म यात्रा की जानकारी दी। इस अवसर पर भगवान नेमिनाथ के मोक्षस्थल गिरनार जी की पांचवीं टोंक की प्रतिकृति का मोमेंटो भेंट किया गया।

एक माह में कार्यवाही की मांग

विश्व जैन संगठन ने स्पष्ट किया कि श्री सम्मेद शिखर जी की पवित्रता से जुड़े विषयों पर शीघ्र कार्यवाही आवश्यक है। संगठन की मांगों पर एक माह के भीतर प्रभावी कार्यवाही नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन आरंभ करने की चेतावनी दी गई।

संदेश और सामाजिक महत्व

श्री सम्मेद शिखर जी जैन समाज की सर्वोच्च आस्था के तीर्थों में शामिल है। संगठन ने प्रशासन और संबंधित मंत्रालयों से तीर्थ की धार्मिक पवित्रता, सुरक्षा और मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा व्यक्त की।