भियांदांत जी। रक्षाबंधन के अवसर पर श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र भियांदांत जी में बड़े बाबा आदिनाथ की पावन भूमि की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की रक्षा का संदेश दिया गया। डॉ. जयेन्द्र जैन ने कहा कि राखी का पवित्र धागा केवल भाई की कलाई पर नहीं, बल्कि हमारी आत्मा, संस्कृति, धर्म और विरासत से हमारे संबंध का प्रतीक है।

राखी का व्यापक संदेश

डॉ. जयेन्द्र जैन ने कहा कि राखी केवल भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अपनी संस्कृति और धार्मिक विरासत की रक्षा के संकल्प का भी अवसर है। कलाई पर बंधा धागा रिश्तों को मजबूत करता है, वहीं संकल्प हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है।

बड़े बाबा की भूमि अमूल्य धरोहर

उन्होंने कहा कि श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र भियांदांत जी के बड़े बाबा आदिनाथ की पावन भूमि केवल पत्थरों और पहाड़ों का समूह नहीं है। यह जैन समाज की आस्था, इतिहास और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इसकी रक्षा करना प्रत्येक समाजजन का धार्मिक और सामाजिक दायित्व है।

पांच संकल्प लेने का आह्वान

रक्षाबंधन पर उन्होंने समाजजनों से क्षेत्र की पवित्रता की रक्षा करने, धर्म एवं संस्कृति को सुरक्षित रखने, प्राचीन विरासत का संरक्षण करने, प्रकृति और पहाड़ों की रक्षा करने तथा बड़े बाबा की इस अमूल्य धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लेने की अपील की।

विरासत से जुड़ने का संदेश

उन्होंने कहा कि कलाई पर बंधी राखी एक दिन टूट सकती है, लेकिन धर्म, संस्कृति और अपनी विरासत की रक्षा का संकल्प कभी नहीं टूटना चाहिए। रक्षाबंधन का पवित्र धागा इस बार केवल रिश्तों को नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े संबंध को भी मजबूत करे।

सच्चा रक्षाबंधन संकल्प

डॉ. जयेन्द्र जैन ने संदेश दिया— “क्षेत्र की रक्षा • धर्म की रक्षा • संस्कृति की रक्षा — यही हमारा सच्चा रक्षाबंधन संकल्प।”

धार्मिक एवं सामाजिक महत्व

रक्षाबंधन को व्यापक सामाजिक और धार्मिक भावना से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता, प्राकृतिक स्वरूप और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

परिचय

डॉ. जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ राष्ट्रीय गौरव शास्त्री, जैन दर्शन एवं ज्योतिष से जुड़े हैं। वे राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, अ.भा. जैन पत्र संपादक संघ के सदस्य तथा भारतीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी, मुंबई से जुड़े हैं।