हमारे तीर्थंकर कर्मों से रहित हैं, इसलिए स्वाधीनः आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी
आचार्य श्री ने आगे मंगल देशना में यह भी कहा- हमें जो संस्कृति मिली, वह भगवान महावीर स्वामी के उपदेश से मिली है न्यूज़ सौजन्य-राजेश पंचोलिया श्रीमहावीरजी। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने कहा है कि हमारी आत्मा कर्मों के अधीन है, इस कारण हम पराधीन हैं। हमारे तीर्थंकर
इंदौर • Shreephal Jain News • 15-08-2022, 02:03 am




















