आत्म साधना में गुरुओं का उपदेश, ध्यान, साधना आवश्यक : आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने धर्मसभा में जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से परिचित करवाया
दिगंबर जैन धर्मशाला, शामली उप्र में गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा का शुद्ध स्वरूप माना गया है। यही आत्म स्वरूप व्यक्ति को जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से जोड़ता है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नाय
इंदौर • Shree Phal News • 28-05-2026, 12:20 am




















