प्रेम, अहिंसा और करुणा से होती है भारत की पहचान - क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज श्री आदिनाथ जन्मकल्याणक महामहोत्सव 1-3 अप्रेल तक
क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज जी ने जयपुर हाउस के संत निवास में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि तीर्थंकर ऋषभदेव ब्राह्मी सुंदरी अपनी पुत्रियों को शिक्षा प्रदान करा शिक्षा संस्कृति की स्थापना की थी। ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवती के नाम से ही इस देश को भारत के ना
इंदौर • Shreephal Jain News • 31-03-2024, 02:41 am





















