धर्मसभा में दिए प्रवचन : जिस बाप की संपत्ति पर भाइयों में लड़ाई हो जाए, समझ लेना उस बाप की कभी सद्गति नहीं हो सकती: निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज
व्यक्ति को अपने जीवन को चलाने के लिए एक ही कारण नहीं होना चाहिए क्योंकि जीवन अनेक पहलुओं से चलता है। एक ही प्रकार का अधर्म नहीं है, तो एक ही प्रकार का धर्म भी नहीं है। अधर्म धर्म को मूल्यवान बनाता है। अंधकार से प्रकाश की, प्यास से पानी की, भूख से रोटी की कीमत बढ़ जाती है। अभाव सद
इंदौर • Shreephal Jain News • 30-09-2024, 07:17 pm





















