विषयाक्त मन बंधन का कारण है विषयारिक्त मन मुक्ति का आधार : मुनि श्री प्रमाण सागरजी ने मन की दिशा और दशा को सारगर्भित व्याख्या से समझाया
मनुष्य के पास न तो शेर जैसा पराक्रम है और न ही चीते जैसी फुर्ती न ही हिरन जैसी चपलता। फिर भी मनुष्य श्रेष्ठ क्यों? इसका उत्तर देते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने कहा कि मन विचार और संकल्प शक्ति से मनुष्य महान बनता है। यह उदगार मुनिश्री ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में
इंदौर • Shreephal Jain News • 16-10-2025, 12:32 am





















