🧘 राजस्थान के संत

राजस्थान के संत

राजस्थान के महान जैन संतों का परिचय एवं जीवनी

बाहरी जगत के प्रलोभनों और विषय-वासनाओं से स्वयं को मुक्त करें : ध्यान और आत्मसाक्षात्कार के लिए मन का शांत और मौन होना आवश्यक

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर • Shreephal Jain News • 02-03-2025, 12:30 pm

कठोर साधना से पूरे राष्ट्र में श्री विजयकीर्ति की आध्यात्मिक पताका फहराई : सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संपादन में भी इनकी भूमिका रही उल्लेखनीय

दिगंबर जैन संतों के दिव्य वचन जैन समाज की आध्यात्मिक चेतना को प्रकाशमान करते हैं। जैन धर्म को सुदृढ़ता के साथ अपनी तपोपासना के माध्यम से दिव्य मार्ग भी बताते हैं। इनके आहार, विहार, विचार को देखकर और सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र महत्ता प्रतिष्ठपित होती है। जैन धर्म के

इंदौर • Shreephal Jain News • 02-03-2025, 11:30 am

आत्मचिंतन, साधना और भक्ति ईश्वर की प्राप्ति के लिए जरूरी : बाहर से सहायता मांगने की बजाय अपने भीतर की शक्ति को पहचानें

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर • Shreephal Jain News • 01-03-2025, 12:30 pm

भैरव राजा ने उनकी भक्ति की इंद्रराज ने चरण पूजेः राजस्थान के जैन संत भट्टारक श्री ज्ञानभूषण जी की कीर्ति दूर-दूर तक फैली

भट्टारक श्रीज्ञानभूषण प्रतिभापूर्ण साधक थे। उन्होंने आत्म साधना के अतिरिक्त ज्ञानाराधना, साहित्य साधना, सांस्कृतिक उत्थान और नैतिक धर्म के प्रचार में अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया। उन्होंने पहले स्वयं अध्ययन किया और शास्त्रों के गंभीर अर्थों को समझा। तत्व ज्ञान की गहराइयों तक पहुंचन

इंदौर • Shreephal Jain News • 01-03-2025, 11:30 am

भीड़ का होना किसी की सत्यता का प्रमाण नहीं : सही और गलत को पहचानने के लिए विवेक और आत्मचिंतन आवश्यक

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर • Shreephal Jain News • 28-02-2025, 12:30 pm

भारतीय संस्कृति, साहित्य और शिक्षा के महानायक थे आचार्यश्री सोमकीर्ति : आत्मसाधना, साहित्य सृजन और समाज के कल्याण के लिए समर्पित था जीवन

दिगंबर जैन संत जीवन के हर पहलू में अत्यधिक संयम, तप और साधना को महत्व देते हैं। वे जैन धर्म के उच्चतम आदर्शों का पालन करते हैं और समाज को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका उद्देश्य आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचानकर मोक्ष की प्राप्ति करना होता है, जो कि जैन धर्म का सर

इंदौर • Shreephal Jain News • 28-02-2025, 11:30 am

सच्ची भक्ति और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलें : सांसारिक विषयों की जगह ईश्वर से जोड़ें मन

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर • Shreephal Jain News • 27-02-2025, 12:30 pm

15वीं शताब्दी के समर्थ विद्वान थे आचार्य श्री ब्रह्म जिनदास : राजस्थानी और गुजराती रचनाओं से किया जनजागरण

दिगंबर जैन संत जीवन के हर पहलू में अत्यधिक संयम, तप और साधना को महत्व देते हैं। वे जैन धर्म के उच्चतम आदर्शों का पालन करते हैं और समाज को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका उद्देश्य आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचानकर मोक्ष की प्राप्ति करना होता है, जो कि जैन धर्म का सर

इंदौर • Shreephal Jain News • 27-02-2025, 11:30 am

संतजन सत्य का दर्पण होते हैं : सच्ची भक्ति और आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, तो अपने दोषों को स्वीकार करना सीखें

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाह

इंदौर • Shreephal Jain News • 26-02-2025, 12:30 pm

करीब 20 वर्षों तक कीं साहित्य रचनाएं : धर्म की गहरी आस्था के साथ समाज में नव जागरण का सूत्रपात किया आचार्य श्री सकलकीर्ति जी ने

दिगंबर जैन संत जीवन के हर पहलू में अत्यधिक संयम, तप और साधना को महत्व देते हैं। वे जैन धर्म के उच्चतम आदर्शों का पालन करते हैं और समाज को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका उद्देश्य आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचानकर मोक्ष की प्राप्ति करना होता है, जो कि जैन धर्म का सर

इंदौर • Shreephal Jain News • 26-02-2025, 11:30 am