भिंड। लश्कर रोड स्थित भगवान महावीर कीर्ति स्तंभ जैन मंदिर में विराजमान समाधि सम्राट परम पूज्य गणाचार्य विराग सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज की परंपरा के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विनय सागर जी महाराज के सान्निध्य में दीक्षित आर्यिका वितपश्री माताजी का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होने पर श्रद्धापूर्वक अंतिम विदाई दी गई।
26 जुलाई को हुई थी आर्यिका दीक्षा
26 जुलाई सायं 4 बजे मुनि श्री विनय सागर जी महाराज ने ब्रह्मचारिणी सावित्री देवी को आर्यिका दीक्षा प्रदान कर उन्हें आर्यिका वितपश्री माताजी नाम से दीक्षित किया। दीक्षा के पश्चात उन्होंने संयममय जीवन का व्रत धारण किया।
णमोकार महामंत्र के मध्य हुआ समाधि मरण
29 जुलाई रात्रि 2:36 बजे आर्यिका वितपश्री माताजी ने णमोकार महामंत्र का श्रवण करते हुए सल्लेखना पूर्वक शांतिपूर्वक समाधि मरण किया। इस समाचार से जैन समाज में शोक के साथ-साथ उनकी उत्कृष्ट साधना के प्रति श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ा।
श्रद्धा के साथ निकली ढोल यात्रा
29 जुलाई प्रातः 7 बजे भगवान महावीर कीर्ति स्तंभ जैन मंदिर से ढोल यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा लश्कर रोड, बंगला बाजार होते हुए वाटर बॉक्स स्थित सूर्य उदासीन आश्रम, नसिया जी मंदिर पहुंची, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई दी गई।
संत सान्निध्य में दी गई अंतिम विदाई
पत्रकार सोनल जैन ने बताया कि नगर में विराजमान मुनि श्री विनय सागर जी महाराज एवं आर्यिका विजिज्ञासा श्री माताजी ससंघ के सान्निध्य में अंतिम विदाई का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर सकल जैन समाज के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संयममय जीवन से मिली प्रेरणा
आर्यिका वितपश्री माताजी का तप, संयम और सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण श्रद्धालुओं के लिए आत्मकल्याण एवं वैराग्य की प्रेरणा बन गया। समाजजनों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्श जीवन को स्मरण किया।



