बड़वानी। दिगंबर जैन समाज के 11वें तीर्थंकर भगवान श्री श्रेयांसनाथ जी के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर समाजजनों ने भगवान की आराधना करते हुए मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया।

अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ शुभारंभ

बड़वानी में विराजित परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञ मति जी, आर्यिका अनघ मति जी एवं क्षुल्लिका संभाव मति जी माता जी के सानिध्य में प्रातः भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य नियम की पूजन संपन्न हुई।

श्रेयांसनाथ विधान एवं निर्वाण लाडू

1008 भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में श्रेयांसनाथ विधान का आयोजन किया गया। पूज्य माताजी की सुमधुर वाणी और मार्गदर्शन में विधान भक्तिभाव एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान को निर्वाण लाडू भी समर्पित किया गया।

रक्षाबंधन का बताया धार्मिक महत्

पूज्य माताजी ने जैन धर्म में रक्षाबंधन पर्व के महत्व और इसे मनाने के पीछे की धार्मिक परंपरा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने अकंपनाचार्य सहित 700 मुनिराजों पर आए उपसर्ग और मुनि विष्णुकुमार द्वारा उनकी रक्षा किए जाने का प्रसंग सुनाया।

मुनि विष्णुकुमार ने की 700 मुनियों की रक्षा

माताजी ने बताया कि हस्तिनापुर नगरी में अकंपनाचार्य सहित 700 मुनिराजों पर उपसर्ग आया था। राजा बलि के मंत्रियों द्वारा षड्यंत्रपूर्वक मुनियों को जलाने का प्रयास किया गया। इसकी जानकारी मुनि विष्णुकुमार को हुई तो उन्होंने अपनी ऋद्धि और तपोबल से वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी।

इसके बाद उन्होंने विराट रूप धारण किया। एक कदम सुमेरु पर्वत और दूसरा मानुषोत्तर पर्वत पर रखा। तीसरे कदम के लिए स्थान नहीं बचने पर राजा बलि ने अपनी पीठ पर पैर रखने का आग्रह किया। इस प्रसंग में राजा बलि ने क्षमा मांगी और मुनि विष्णुकुमार ने 700 मुनियों को उपसर्ग से बचाया। देवताओं एवं राजा बलि द्वारा क्षमा मांगने के बाद यह प्रसंग धर्म एवं साधु-संतों की रक्षा से जुड़े रक्षाबंधन पर्व की परंपरा से जोड़ा जाता है।

सामूहिक रक्षाबंधन का आयोजन

माताजी ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर जैन मुनियों को आहार में खीर देने की भी परंपरा रही है। कार्यक्रम के दौरान समाजजनों द्वारा सामूहिक रक्षाबंधन पर्व भी मनाया गया। श्रद्धालुओं ने धर्म, साधु-संतों एवं जैन संस्कृति की रक्षा के भाव के साथ पर्व को भक्तिभाव से मनाया।

धर्म और संस्कृति की रक्षा का संदेश

पूरे आयोजन में भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक की आराधना के साथ रक्षाबंधन पर्व के माध्यम से धर्म और श्रमण संस्कृति की रक्षा का संदेश दिया गया। समाजजनों ने धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक सहभागिता कर पर्व की आध्यात्मिक भावना को आत्मसात किया।