इंदौर। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर दलाल बाग, छत्रपति नगर में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के पावन सानिध्य में रक्षाबंधन पर्व का भव्य आध्यात्मिक आयोजन हुआ। इस अवसर पर जैन समाज ने भगवान, देव शास्त्र गुरु एवं श्रमण संस्कृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रमण संस्कृति की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया। मुनि श्री ने रक्षाबंधन पर्व के पीछे छिपे जैन धर्म के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने आचार्य अकंपनाचार्य जी सहित सात सौ मुनिराजों पर आए भयंकर उपसर्ग का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि धर्म, साधु-संतों और श्रमण संस्कृति की रक्षा का संकल्प पर्व है। उन्होंने कथा के माध्यम से मौन, संयम, क्षमा, अहंकार और कषाय का गहरा संदेश दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जीवन में इगो पाइंट और प्रेस्टिज पाइंट नहीं बनाना चाहिए। परिवार में पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चों के बीच अथवा समाज में यदि व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा और अहंकार को सबसे ऊपर रखता है तो संबंधों में दरार आ जाती है। मुनिश्री सुधासागर जी श्रमण संस्कृति रक्षा दिवस पर दलाल बाग में विशेष समारोह को संबोधित कर रहे थे।

कई बार लड़ाइयों से दूर रहना ही सबसे बड़ी जीत

मुनिश्री सुधासागर जी ने कहा कि हर लड़ाई जीतना जरूरी नहीं है, कई लड़ाइयों से दूर रहना ही सबसे बड़ी जीत है। साथ ही उन्होंने यह भी संदेश दिया कि दुष्टता का उत्तर दुष्टता से नहीं, बल्कि संयम और विवेक से देना चाहिए। इस अवसर पर मुनिश्री ने श्रमण संस्कृति की रक्षा का विशेष रक्षावंदन संकल्प कराया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे श्रमण संस्कृति, धर्म, धर्मात्माओं तथा देव शास्त्र गुरु की रक्षा और सम्मान के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

पहली बार विशाल स्तर पर हुआ विधान दो लाख श्रीफल अर्पित

रक्षाबंधन के अवसर पर इंदौर में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ विधान में बैठे। दलाल बाग का पूरा परिसर भक्ति और श्रद्धा से सराबोर दिखाई दिया। रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रीफल भेंट कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। एक साथ बड़ी संख्या में श्रीफल देखकर पूरा वातावरण अद्भुत धार्मिक ऊर्जा से भर गया जैन समाज के लोगों के लिए यह दृश्य अत्यंत भावुक एवं गौरवपूर्ण था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा इंदौर श्रमण संस्कृति की आराधना और गुरुदेव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए एकत्रित हो गया हो।

इनकी उपस्थिति ने किया गौरवान्वित किया

महा महोत्सव के दौरान चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, चक्रवर्ती गौरव मनीष गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, विजय पाटोदी, आशा रानी पंड्या, प्रिंसपाल टोंग्या, गिरीश गिन्नी, आकाश कोयला, मंत्री अक्षय कासलीवाल, प्रचार मंत्री संजय पाटोदी, शरद पानोत, सौरभ बड़जात्या, अशोक नगर जैन समाज मंत्री विजय धुर्रा, संजय सामरिया, आशीष जैन, अर्चना गोधा, मुकेश गोधा भूपेंद्र भोपाली, राहुल जैन, विवेक जैन, विजय जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। संचालन एवं धार्मिक क्रियाएं प्रदीप ब्रह्मचारी ने विधिवत संपन्न कराईं।

इंदौर के लिए गौरव का क्षण

पूज्य मुनिश्री सुधा सागर जी के सानिध्य में हुअर यह रक्षाबंधन महोत्सव केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इंदौर के जैन समाज की एकजुटता, श्रद्धा और श्रमण संस्कृति के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण बन गया।

मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में 10 हजार रक्षासूत्र

देशभर से आए साधकों ने सामूहिक महाअर्ध्य देकर लिय वीआईपी रोड स्थित दलाल बाग के विशाल परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप में शुक्रवार को रक्षाबंधन के पावन महापर्व पर मुनिश्री सुधासागर के पावन सानिध्य में देशभर से आए करीब 10 हजार समाज बंधुओं ने धर्म, साधु-संतों और श्रमण संस्कृति के साथ देव, शास्त्र और गुरु की रक्षा का संकल्प भी लिया और जैन समाज के 700 मुनियों पर आए भयंकर उपसर्ग के दिवस पर एक-दूसरे को रक्षासूत्र बांधकर दो लाख से अधिक श्रीफल से सामूहिक महाअर्ध्य समर्पित कर श्रमण संस्कृति रक्षा दिवस धूमधाम से मनाया। देशभर से भक्तों ने मुनिराजों की महा आराधना की। इस दौरान बार-बार रक्षावंदन और श्रमण संस्कृति के जयघोष से समूचा पांडाल गुंजायमान बना रहा। शहर के इतिहास में पहली बार विशाल स्तर पर रक्षाबंधन महामहोत्सव विधान का भक्ति और श्रद्धा से भरपूर अनुष्ठान देखने को मिला। देशभर से आए करीब 10 हजार समाज बंधु सभा मंडप में सुबह 6 बजे से ही जमा होने लगे थे। समूचा मंडप केशरिया साड़ी में मातृशक्ति और श्वेत परिधान में पुरुषों से खचाखच भरा नजर आ रहा था। यह अनूठा दृश्य इंदौर के धार्मिक और आध्यात्मिक जगत में पहली बार देखने को मिला। समूचा पांडाल दो लाख से अधिक श्रीफलों से भर गया। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर विधान किया और मुनिश्री के चरणों में अपनी आस्था व्यक्त की। दलाल बाग में यह नजारा शहर के लोगों को लंबे समय तक याद रहेगा। मुनिश्रर सुधासागरजी के पावन सानिध्य में सबसे पहले अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद पाद प्रक्षालन का क्रम प्रारंभ हुआ। मंगलाचरण के बाद शास्त्रोक्त विधान से रक्षाबंधन पूजन एवं मुनिराज आराधना के बाद सामूहिक रक्षाबंधन का अनूठा आयोजन प्रारंभ हुआ। इसके बाद वात्सल्य सूत्र का दिव्य आयोजन शुरू हुआ। जिसमें 10 हजार से अधिक समाज बंधुओं ने एक-दूसरे को वात्सल्य सूत्र बांधे। इसके पूर्व बालब्रह्मचारी प्रदीप भैया, पारस भैया और अमित सिंघई के निर्देशन में प्रत्येक परिवार के 7 सदस्यों ने 700 श्रीफल से 700 मुनियों के उपसर्ग दिवस के उपलक्ष्य में उनके प्रति कृतज्ञता स्वरूप श्रीफल से सामूहिक अर्ध्य समर्पित किया।

इतिहास और संस्कृति महत्व को समझना होगा

इस दौरान मुनिश्री सुधासागर जी ने अपने आशीर्वचन में रक्षाबंधन की पृष्ठभूमि में जैन धर्म के इतिहास एवं आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने आचार्य अकंपनाचार्य सहित 700 मुनिराजों पर आए भयंकर उपसर्ग का भावपूर्ण प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं बल्कि धर्म, साधु-संतों और श्रमण संस्कृति की रक्षा का भी संकल्प पर्व है। उन्होंने एक कथा के माध्यम से मौन, संयम, क्षमा, अहंकार और कषाय का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में कभी भी ईगो पॉइंट और प्रेस्टीज पॉइंट नहीं बनाना चाहिए। परिवार में पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चों के बीच अथवा समाज में यदि व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा और अहंकार को सबसे ऊपर रखता है तो संबंधों में दरार आ ही जाती है। इस स्थिति में याद रखें कि हर लड़ाई जीतना जरुरी नहीं है। कई लड़ाइयां ऐसी होती हैं। जिनमें उनसे दूर रहना ही सबसे बड़ी जीत होती है। दुष्टता का जवाब दुष्टता से नहीं, संयम और विवेक से देना चाहिए। इस दौरान सभामंडप रक्षावंदन करो-रक्षावंदन करो और श्रमण संस्कृति के जयघोष से गुंजायमान होता रहा। पर्यूषण महापर्व पर 15 सितंबर से श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन भी होगा। जिसके लिए पंजीयन शुरू हो गए हैं। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक मुनिश्री के मुखारबिंद से अमृत वर्षा का क्रम जारी है।