कुचामन सिटी। सकल जैन समाज कुचामन के सचिव सुभाष पहाड़िया ने बताया कि रविवार, 2 अगस्त को कुचामन सिटी से 15 श्रावक-श्राविकाओं का दल छह दिवसीय जैन तीर्थयात्रा के लिए रवाना हुआ। यात्रा का उद्देश्य प्रमुख जैन तीर्थक्षेत्रों के दर्शन के साथ धर्माराधना, आत्मसाधना और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।
प्रमुख तीर्थक्षेत्रों के होंगे दर्शन
यात्रा के दौरान श्रद्धालु छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के प्रमुख जैन तीर्थ एवं दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करेंगे। यात्रा मार्ग में बालाघाट, राजनांदगांव, डोंगरगढ़, रामटेक, बाजारगांव, भातकुली, कारंजा, लाल कारंजा, चिखलदरा, मुक्तागिरि एवं बैतूल शामिल हैं। यहां स्थित जैन मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन एवं धर्माराधना करेंगे।
अभिषेक और पूजन से विश्वशांति की मंगलकामना
श्रद्धालु विभिन्न तीर्थस्थलों पर कलशाभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं विधान करेंगे। धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से विश्वशांति, सभी प्राणियों के कल्याण, सुख-समृद्धि, अमन-चैन तथा अहिंसा के संदेश के प्रसार की मंगलकामना की जाएगी।
आत्मसाधना से जीवन को बनाएंगे धर्ममय
यात्रा के दौरान श्रद्धालु तीर्थदर्शन के साथ आत्मसाधना पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने अपने जीवन को धर्ममय एवं कल्याणकारी बनाने तथा तीर्थयात्रा के माध्यम से आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
15 श्रावक-श्राविकाएं यात्रा में शामिल
यात्रा दल में श्री जैन वीर मंडल के सचिव सुभाष–मंजू पहाड़िया, सांस्कृतिक मंत्री प्रमोद–विनिता पांड्या, नागौरी मंदिर अध्यक्ष विनोद–उषा झाझरिया, उपाध्यक्ष अजित पहाड़िया, अजमेरी मंदिर के सचिव मनोज–ममता पांड्या, उपाध्यक्ष राजकुमार–सुमित्रा सेठी, कार्यकारिणी सदस्य सुभाष–इन्द्रा गगवाल तथा विनोद–संगीता पहाड़िया सहित कुल 15 श्रावक-श्राविकाएं शामिल हैं।
जियो और जीने दो का संदेश
प्रस्थान से पूर्व यात्रा दल ने सभी के मंगल, विश्वशांति तथा “जियो और जीने दो” एवं अहिंसा धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने तीर्थयात्रा को धर्म, साधना, आत्मकल्याण और जीवदया की भावना से जोड़ते हुए मंगलमय यात्रा की कामना की।



