आगरा। जयपुर हाउस स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति के तत्वावधान में तपस्वी सम्राट वर्षायोग-2026 के तहत वात्सल्य पर्व, 700 मुनिराजों के रक्षा दिवस एवं श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री सौभाग्य सागर जी महाराज ससंघ का पावन सान्निध्य मिला। कार्यक्रम श्रद्धा,भक्ति और उल्लास के साथ सानंद संपन्न हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। भगवान के जयकारों, भक्ति संगीत और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः भगवान के अभिषेक के साथ हुआ। इसके बाद शांतिधारा एवं विधिवत पूजा-अर्चना की गई।श्रद्धालुओं ने विभिन्न धार्मिक द्रव्यों से भगवान का पूजन कर सुख- शांति,समृद्धि और धर्म की मंगल कामना की।

साधु-संतों का जीवन त्याग, संयम और अहिंसा का प्रतीक

इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति संगीत की मधुर स्वर लहरियां गूंजती रहीं।भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान की आराधना में लीन नजर आए। भक्ति संगीत के बीच लगातार गूंजते भगवान के जयकारों से वातावरण आध्या त्मिक ऊर्जा से भर गया। प्रवचन के दौरान आचार्यश्री सौभाग्य सागरजी महाराज ने वात्सल्य पर्व एवं मुनि रक्षापर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में साधु-संतों का जीवन त्याग, तप, संयम और अहिंसा का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को अपने जीवन में धर्म, संयम, करुणा और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाने तथा साधु-संतों के प्रति श्रद्धा और वात्सल्य भाव बनाए रखने का संदेश दिया।

श्रद्धालुओं ने सहभागिता की

प्रातः8:00 बजे श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर भक्तिभावपूर्वक 11 निर्वाण लाडू भगवान के चरणों में अर्पित किए गए। निर्वाण लाडू समर्पित किए जाने के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और मोक्षमार्ग के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इसके पश्चात मंगल आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

सेवई की खीर का वितरण किया

मंगल आरती के दौरान दीपों की रोशनी, घंटियों की मधुर ध्वनि और भक्तिमय वातावरण से मंदिर परिसर आलोकित हो उठा।वहीं 700 मुनिराजों के रक्षा दिवस के रूप में मनाए गए रक्षाबंधन पर्व पर विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। आचार्यश्री सौभाग्य सागर महाराज की पीछी पर स्वर्ण राखी,मुनिश्री स्वयंभूसागर जी महाराज की पीछी पर चांदी की राखी तथा क्षुल्लिका श्री सुअथेष्टमति माताजी की पीछी पर राखी बांधने का सौभाग्य बोली के माध्यम से सौभाग्यशाली परिवारों ने प्राप्त किया।श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक राखी अर्पित करते हुए धर्म, संयम और साधु-संतों की रक्षा एवं उनके उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी राखी अर्पित करने की व्यवस्था की गई।इसके साथ ही मंदिर में चल रहे 16 दिवसीय विधान के अंतिम दिवस के धार्मिक अनुष्ठान भी विधि विधानपूर्वक संपन्न हुए।समापन अवसर पर मंदिर समिति की ओर से पहली बार सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से सेवई की खीर का वितरण किया गया।

समाजजनों ने परिवार सहित कार्यक्रम में सहभागिता की

प्रसाद ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने आयोजन के प्रति प्रसन्नता व्यक्त की। वहीं बड़ी संख्या में श्रावकों को आचार्य संघ को आहार कराने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ।पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति, संगीत,पूजन,धार्मिक अनुष्ठानों, मंगल आरती और जयकारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने परिवार सहित कार्यक्रम में सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग 20 वर्षों बाद जयपुर हाउस मंदिर में इस प्रकार के विशेष धार्मिक आयोजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

आध्यात्मिक आनंद भक्ति, वात्सल्य का अवसर

यह आयोजन समस्त समाज के लिए आध्यात्मिक आनंद भक्ति, वात्सल्य और पुण्यार्जन का विशेष अवसर बना।कार्यक्रम का समापन मंगल आरती, भगवान के जयकारों एवं मंगल भावनाओं के साथ हुआ। इस अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति,तपस्वी सम्राट वर्षायोग समिति,शांतिनाथ युवा मंडल, शांतिनाथ महिला मंडल एवं स्वास्तिक महिला मंडल के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।