अक्षय तृतीया पर भक्ति की बिखरीं सुर लहरियां : जैन भजनों से गुंजायमान हुआ शालीमार एन्क्लेव

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सोमवार को शालीमार एन्क्लेव स्थित पारस जैन कंसल एवं मधु जैन कंसल के निवास पर भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्ममय वातावरण का आनंद लिया और भक्ति में सराबोर हो गए। आगरा से पढ़िए, यह खबर...
आगरा। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सोमवार को शालीमार एन्क्लेव स्थित पारस जैन कंसल एवं मधु जैन कंसल के निवास पर भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्ममय वातावरण का आनंद लिया और भक्ति में सराबोर हो गए। सायं काल आरंभ हुए इस आयोजन में जैन भजनों, स्तुतियों एवं कीर्तन की मधुर प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति की सुर लहरियों के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। पूरा परिसर जिनवाणी की गूंज से पवित्र और ऊर्जावान हो गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने अक्षय तृतीया के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे धर्म, दान और साधना का पर्व बताया। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में एकता, संस्कार और सामूहिक भक्ति का सुंदर संदेश भी दिया।कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान की। सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक मंगल पाठ कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं मानव कल्याण की कामना की। इस अवसर पर मधु जैन कंसल, अर्पणा जैन, नेहा जैन, नीतू जैन, नीति जैन, कल्पना जैन,शशि जैन,रुपा जैन सहित समस्त महिला मंडल की सक्रिय सहभागिता रही।
प्रतिक्रिया व्यक्त करेंShare your reaction
इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया चुनें।Pick your reaction to this story.
संबंधित खबरेंRelated News
दशलक्षण और निमाड़ के परिवार सीरीज 3मंदिर के पास रहते-रहते जीवन में उतरे धर्म के संस्कार : बड़ों को देखकर बच्चों ने भी बनाए देवदर्शन, शुद्ध भोजन और संयम के अपने नियम
खंडवा के अविनाश जैन परिवार में बड़ों से मिले धर्म-संस्कार बच्चों के अपने नियम बने। दशलक्षण में उपवास, देवदर्शन, जैन भोजन और बाहर के भोजन का त्याग किया।
खंडवा • सन्मति जैन काका • 19-09-2026, 01:29 pm
शुद्ध को अशुद्ध न करना ही उत्तम शौच धर्म की साधना : मुनिपुंगव सुधासागर जी ने विद्या सुधा देशना मंडप में श्रावकों को दी मंगल देशना
दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन शनिवार को दलाल बाग स्थित विद्या सुधा देशना मंडप में चल रहे 10 दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर में निर्यापक मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने उत्तम शौच धर्म की गहन व्याख्या करते हुए कहा कि शौच धर्म केवल बाहरी स्वच्छता नहीं, बल्कि मन, वचन, शरीर और आचरण की शुद्धता है। इंदौर से पढ़िए, राजेश जैन दद्दू की यह खबर...
इंदौर • राजेश जैन दद्दू • 19-09-2026, 01:10 pm



