तिजारा। वात्सल्य रत्नाकर परम पूज्य आचार्य श्री 108 विमलसागर जी महामुनिराज की 111वीं जन्म जयंती के अवसर पर 11वां श्रुत-स्मृति महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित हुआ। तिजारा की पावन धर्मनगरी में श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के तप, त्याग, संयम, साधना और धर्म प्रभावना को स्मरण करते हुए भावपूर्ण विनयांजलि अर्पित की।
आचार्य श्री विमलसागर जी महामुनिराज का संपूर्ण जीवन जैन धर्म की प्रभावना, आत्मसाधना, धार्मिक शिक्षा और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके द्वारा प्रदर्शित संयम, त्याग और आत्मकल्याण का मार्ग आज भी असंख्य श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
श्री चंद्र तीर्थ मंडपम में धार्मिक आयोजन
मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन एवं प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि अष्टम तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की पावन नगरी तिजारा स्थित श्री चंद्र तीर्थ मंडपम में आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज तथा साधु-संतों के सानिध्य में आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात पूजन, भक्ति, विनयांजलि एवं महाआरती सहित विविध धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री विमलसागर जी के जीवन, साधना एवं आध्यात्मिक योगदान का स्मरण करते हुए उनके बताए धर्ममार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
संत शरीर से दूर हो सकते हैं, संस्कारों से नहीं
आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने अपने दादागुरु आचार्य श्री विमलसागर जी महामुनिराज के प्रति विनयांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महान संत शरीर रूप में हमारे बीच भले ही उपस्थित न हों, किंतु उनके संस्कार, साधना, उपदेश और धर्म प्रभावना सदैव समाज में जीवंत रहते हैं।
उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विमलसागर जी का तप, त्याग और साधनामय जीवन धर्म समाज के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा। उनके सानिध्य में आने वाले असंख्य श्रद्धालुओं ने आत्मकल्याण और आध्यात्मिक जीवन की दिशा प्राप्त की।
धर्म प्रभावना में उल्लेखनीय योगदान
आचार्य श्री विमलसागर जी महामुनिराज ने अनेक जिनालयों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार, तीर्थों के विकास तथा धार्मिक साहित्य के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रेरणा से धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन, मनन और प्रकाशन को प्रोत्साहन मिला।
उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे महान संत समाज के लिए केवल स्मृति नहीं, बल्कि धर्म, संयम और आत्मकल्याण की जीवंत प्रेरणा होते हैं। उनके तपस्वी एवं संयमित जीवन से आने वाली पीढ़ियां भी मार्गदर्शन प्राप्त करती रहेंगी।
मंदिर समिति ने अर्पित की विनयांजलि
महोत्सव में मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, नीरज जैन, अमन जैन, शैलू जैन, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन, रवि जैन एवं अंशुल जैन सहित मंदिर समिति के पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री विमलसागर जी महामुनिराज को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
श्रीफल साथी : सोनल जैन




