गुना में चल रहे पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कर्म, धर्म, माता-पिता के उपकार और आत्मचिंतन पर प्रेरक प्रवचन दिए। साथ ही सर्व समाज सम्मेलन एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के आगमन की जानकारी दी गई। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।
गुना। पंचमुखी श्री मद् जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विशाल धर्मसभा में राष्ट्रसंत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कर्म, धर्म और जीवन मूल्यों पर आधारित ओजस्वी प्रवचन देते हुए श्रद्धालुओं को आत्मजागरण का संदेश दिया।कर्म और धर्म का अंतर समझाया

मुनिश्री ने कहा कि धर्म और कर्म की व्यवस्था भिन्न होती है। कर्म के प्रभाव से मनुष्य ऊँचाइयों तक पहुंच सकता है, लेकिन उसका पतन भी निश्चित होता है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि थोड़ी सी अनुकूलता मिलते ही मनुष्य अपने स्वभाव और मर्यादा को भूल जाता है। इसी भूल को सुधारना ही धर्म का उद्देश्य है।

आज होगी महाशांतिधारा एवं धर्मसभा

मुनि सुब्रतनाथ जिनालय समिति के अध्यक्ष मनोज स्वराज एवं मंत्री तरुण जैन ने बताया कि मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का तेलघानी मेन रोड स्थित मुनि सुब्रतनाथ जिनालय में आगमन होगा। दोपहर 3 बजे विशेष धर्मसभा आयोजित होगी, जिसमें विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों को गुरुदेव के पादप्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त होगा। साथ ही केंद्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया के आतिथ्य में सर्व समाज सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री का होगा अभिनंदन

मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव समिति, अशोक नगर जैन समाज एवं मध्यप्रदेश महासभा द्वारा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का अभिनंदन किया जाएगा। कार्यक्रम में भव्य अगवानी, आहारचर्या तथा सर्व समाज सम्मेलन का आयोजन होगा।

शीतलनाथ भगवान का महा मस्तकाभिषेक

मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी का 108 रिद्धि मंत्रों से महा मस्तकाभिषेक संपन्न हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान का सौभाग्य पुण्याजक परिवार अखिलेश जैन, डॉ. प्रीतेश जैन, डॉ. राहुल जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।

माता-पिता के उपकार कभी न भूलें

अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि जीवन में कुछ ऐसे संबंध होने चाहिए जिनसे कभी असत्य न बोला जाए। उन्होंने माता-पिता, गुरु, भगवान और जिनवाणी के प्रति पूर्ण निष्ठा रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सबसे बड़े उपकारी माता-पिता होते हैं। जो संतान उनके उपकारों को भूल जाती है, वह अपने विनाश का मार्ग स्वयं प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि संतान को सदैव माता-पिता के काम आना चाहिए, न कि उनसे अपने काम लेने की अपेक्षा रखनी चाहिए।

आत्मचिंतन का दिया संदेश

मुनिश्री ने कहा कि धर्म केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का विषय है। सत्य, कृतज्ञता और आत्मचिंतन के साथ जीवन जीने वाला व्यक्ति संसार में रहते हुए भी कमल की भांति निर्मल बना रहता है।