आगरा। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के तीन शिष्य श्रमण मुनि श्री समत्व सागर जी, मुनि श्री शील सागर जी, मुनि श्री सुप्रभात सागर जी ससंघ के सानिध्य में सोमवार को युवा एवं युवतियों और पुरुष एवं महिलाओं को वंडरफुल जैनिज़्म 7 में डीप डाइव (आइए गहराई में उतरें और नई ऊर्जा से जुड़ें अभियान से जोड़ा गया। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में आयोजित जैन धर्म पर आधारित शानदार सत्र आधिकारिक रूप से जारी है। इस पहल का उद्देश्य युवा सोच को प्रेरित करना और जैन दर्शन, मूल्यों, आध्यात्मिकता तथा आत्म-विकास के मार्ग की गहरी समझ प्रदान करना है। इस अवसर पर मुनि श्री का पाद प्रक्षालन महावीर प्रसाद जैन, सुराजो देवी जैन राजीवकुमार जैन परिवार ने किया। ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता से भरपूर यह सत्र इतना प्रभावशाली था कि सभागार नगर के युवाओं से खचाखच भरा हुआ था। पूरे उत्साह के साथ युवाओं ने एक स्वर में उद्घोष किया प्राउंड टू वी ए जैन।
सूरज जल्दी भी उग जाए लेकिन, वे जागते तो लेट ही
संयुक्त धर्मसभा में मुनि श्री समत्व सागर जी के मार्गदर्शित वंडरफुल जैनिज्म 7 के विशेष सत्र में उन्होंने कहा कि एक बार फिर आपका सब का स्वागत है और जैन धर्म की अद्भुत यात्रा में जो विगत कुछ दिनों से आगरा में चालू है और फिर से हम हर बार की तरह लेट चल रहे हैं। आप लोग टाइम पर हैं? हाँ, कुछ लोग टाइम पर हैं, लेकिन कुछ लोग तो लेट ही चलते रहेंगे। लेट ही उगना है, लेट ही उठते हैं। सूरज जल्दी भी उग जाए लेकिन, वे जागते तो लेट ही हैं। ऐसे लोगों से ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन, जो यहां पर बैठे हुए हैं, जो टाइम की कीमत करते हैं, वक्त की कीमत करना जानते हैं, उनका वक्त बदलते देर नहीं लगती है।
गहराई में चलेंगे क्योंकि ऊपर तैरने में मज़ा नहीं
इसलिए जो यहां पर आए हैं, वक्त पर आए हैं और कुछ समझना चाहते हैं कि कुछ मेरे जीवन में कुछ परिवर्तन दिखाई दे सकता है। पिछले छह सेशंस में आपने बहुत सारी यात्राएं की हैं। आप अलग-अलग चीज़ों पर फोकस कर चुके हैं और हो सकता है अभी उतना फोकस नहीं गया हो लेकिन, आज कुछ ऐसी बात करने जा रहे हैं जो सामान्य नहीं है, कुछ विशेष है क्योंकि आज ऊपर-ऊपर बात नहीं करेंगे। गहराई में चलेंगे क्योंकि ऊपर तैरने में मज़ा नहीं आता है।
गहरे से निकाल के लाते हैं तो कुछ और फैक्ट्स सामने आते हैं
जब भी कोई स्विमिंग पूल में तैरता है ना तो बहुत छोटा होता है। लेकिन जो नदी की गहराइयों में उतरता है, समुद्र की गहराइयों में जो जाता है, उसका आनंद कुछ अलग ही होता है। आज भी कुछ हम ऐसा ही करने जा रहे हैं और इस जैन धर्म की उन गूढ़ रहस्यों को समझने के लिए द डीप डाइव मेथड से हम जानेंगे कि कैसे हम सच्चाई तक पहुंच सकते हैं। हम बात करेंगे आज डीप डाइव की। आई थिंक एवरीवन यूज़ एआई, करेक्ट? सभी लोग एआई का यूज़ करते हैं? एआई में एक तो है ऊपर-ऊपर पूछा जाता है और एक होता है उससे कहो कि गहरे से निकाल के लाओ। गहरे से निकाल के लाते हैं तो कुछ और फैक्ट्स सामने आते हैं, लेकिन ऊपर-ऊपर से पूछे जाते हैं तो बहुत कम फैक्ट्स सामने आते हैं। तो आप धीरे से उससे बोल देते हैं- द डीप डाइव।
जैन धर्म के कौन से सिद्धान्त में कितना गहरा रहस्य छुपा हुआ है
कीजिए, थोड़ा डीप डाइव में बहुत जगह से खोज-खाज के लाइए कि क्या सही है, क्या गलत है और जब रिजल्ट्स देखे जाते हैं तो आपके होश उड़ जाते हैं, करेक्ट? कई बार यह होता है कि हम जो जानते नहीं थे, वह भी तब हमें पता चलता है। जब हम डीप डाइव मेथड से उसके फैक्ट्स को जान जाते हैं। आज कुछ ऐसा ही होने वाला है, चिंता मत कीजिए। जब यहां से निकलेंगे तो आँखें फटी रह जाएंगी और पिछली बार रोए थे? पिछली बार आप सब की आंखों में आंसू थे, मुझे पता है। लेकिन इस बार आप कहेंगे और देखता हूँ कि जैन धर्म के कौन से सिद्धान्त में कितना गहरा रहस्य छुपा हुआ है, यह जानने के लिए जुड़ना है।
क्या होती है उनके पीछे की रियल्टी
बच्चों! बहुत बढ़िया। अब मेरी तरफ़ देखोगे, सबका मौन है। ठीक है? मज़ा आएगा देखो। अगर मज़ा लेना है और बहुत सारी चीज़ें जो आपके फ्रेंड्स आपसे बोलते होंगे, आज का अगर आपने यह सेशन बहुत अच्छे से सुन लिया तो डेफिनेटली आप बहुत सारे आंसर्स देने में सक्षम हो जाएंगे जो आपके फ्रेंड्स और शायद आप भी अपने जीवन में नहीं जानते। तो चलते हैं सबसे पहले बात करते हैं जैन धर्म के उन सिद्धान्तों की जो हम हमेशा से फॉलो करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक हमें पता नहीं था कि वे सिद्धान्त किस बेस पर होते हैं, क्या होती है उनके पीछे की रियल्टी, क्या होते हैं उनके अंदर के फैक्ट्स।
फूड तो एक सा ही होता है, फूड्स में भी बहुत बड़ा अंतर होता ह
हम हमेशा सुनते तो आए हैं कि ऐसा मत करो। जैन धर्म में सुबह से मंदिर जाने की बात कही, दूसरी बात कही गई कि रात्रि में भोजन नहीं करना है, पानी छानकर पीना है। और भी ऐसे बहुत सारे रूल्स-यह मत खाओ, वह मत करो, घर में खाओ, बाहर मत खाओ। आखिर ऐसा क्यों?वाट हैपेंड ? व्हाट्सप्प क्या फर्क पड़ता है यदि मैं घर का भोजन करूँ या बाहर का भोजन करूं? कोई फर्क पड़ेगा क्या? कोई फर्क नहीं पड़ता न? तो फूड तो एक सा ही होता है, लेकिन फूड्स में भी बहुत बड़ा अंतर होता है। क्या अंतर होता है? देखिए स्वाद बदलता है।
उस व्हीट के आपने उसके प्रोसेस को चेंज किया
गेहूँ से बनने वाला आटा, गेहूँ से बनने वाली रोटी, गेहूँ से उसी आटे से बनने वाली पूरी, गेहूँ से उसी आटे से बनने वाली बाटी, गेहूँ से उसी आटे से बनने वाला हलवा सबका स्वाद आने लगा? अभी चिंता नहीं करो, थोड़ी देर लगेगी हलवा मिलने में। लेकिन हलवा जब मिलेगा तब मिलेगा, लेकिन पहली चीज़ देख लेते हैं, बस छोटा सा व्हीट है और उस व्हीट के आपने उसके प्रोसेस को चेंज किया है, तो बहुत बड़ा अंतर आ गया, टेस्ट में भी अंतर आ गया। और इसके साथ एक और अंतर आ रहा है-यदि फाइननेस कर दी जाए... गेहूँ को पहले दलिया खाओगे तो टेस्ट अलग आएगा। आटा जो रहता है मोटी रोटी का आटा, बाटी का आटा वह अलग होता है। उसी गेहूँ को थोड़ा फाइन कर दीजिए, तो उसका स्वाद अलग हो जाता है और उसी का स्वाद जब उसकी मैदा बन जाती है, तो उसका स्वाद बदल जाता है। देखा आपने? मैदा की चीज़ें आप खाते हैं, रोज़ खाते हैं, डेली खाते हैं शायद मुझे लगता है। मंच संचालन विजय शास्त्री ने किया।
इस अवसर पर यह समाजजन मौजूद रहे
इस मौके पर श्रुत मंथन वर्षायोग समि’ि के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लालाजी), मुकेश जैन , रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल)आशीष जैन (बाबा), राजीव जैन, सचिन जैन(तार), आशु (वीके), रोहित जैन, नितिन, सनी, अनिकेत, मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त मंडल एवं सकल जैन मौजूद था।




