इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी के घूंघट गार्डन में सन्मति समवशरण पांडाल में रविवार को धर्मसभा में आचार्य श्री सुनीलसागर जी ने कहा कि जिनेन्द्र भगवान की भक्ति जो पागलों की तरह करते हैं, उन पर प्रभु की कृपा बादलों की तरह बरसती है। जब हम भक्ति भाव से प्रभु को पुकारते हैं, तो वे हमें भी आकर मझधार से तारते हैं। जब तक जीवन में भक्ति की हवा नहीं होती, तब तक डूबना ही डूबना और क्लेश ही क्लेश बना रहता है, लेकिन जब जीवन में भक्ति की हवा भर जाती है, तब जीव संसार सागर से पार उतर जाता है। आचार्य श्री के सान्निध्य में इंदौर में आयोजित इन्द्रध्वज महामंडल विधान की आराधना अत्यंत भक्तिमय वातावरण में निरंतर चल रही है। विधान के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव, श्रद्धा और उत्साह के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं। जिनेन्द्र भगवान की आराधना, मंत्रोच्चार और पूजन से संपूर्ण वातावरण धर्ममय बना हुआ है। आचार्य श्री के मंगलकारी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भक्ति, आत्मकल्याण और आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा प्राप्त हो रही है।

दो दिवसीय संगोष्ठी में हुआ विमर्श

इसी क्रम में 16 एवं 17 अक्टूबर को ‘भारतीय जैन परंपरा एवं जैन साहित्य’ विषय पर राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। संगोष्ठी में जैन परंपरा, साहित्य और उसकी समृद्ध ज्ञान-धरोहर से जुड़े विषयों पर विद्वानों ने विचार-विमर्श किया। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय जैन परंपरा के आध्यात्मिक एवं साहित्यिक वैभव को रेखांकित करना तथा उसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। एक ओर राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी के माध्यम से जैन ज्ञान-परंपरा का विमर्श हुआ, वहीं दूसरी ओर इन्द्रध्वज महामंडल विधान की आराधना से धर्म और भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। आचार्य श्री के प्रेरक संदेश श्रद्धालुओं को यह भाव ग्रहण करने की प्रेरणा दे रहे हैं कि सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के क्लेशों से उबरकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का माध्यम है।