नगर में आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ विराजित हैं। यहां उनका चातुर्मास चल रहा है। इस दौरान यहां के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ नित्य मुनिश्री के प्रवचन भी धर्मलाभ करवा रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, यह खबर...
पथरिया। नगर में आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ विराजित हैं। यहां उनका चातुर्मास चल रहा है। इस दौरान यहां के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ नित्य मुनिश्री के प्रवचन भी धर्मलाभ करवा रहे हैं। प्रवचन में बड़ी संख्या में गुरु भक्त यहां पधार रहे हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने कहा कि, पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में जारी है। उनके शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागरजी ने प्रवचन में कहा कि संसार में सबसे मूल्यवान चीज़ है विश्वास और विश्वास की बुनियाद है ईमानदारी। उन्होंने कहा कि जिन्हें दो चेहरे पसंद हैं, उन्हें कोई पसंद नहीं करता।
इसका अर्थ सीधा है, जो लोग दोहरी ज़िंदगी जीते हैं, जो सामने कुछ और होते हैं और पीठ पीछे कुछ और ऐसे लोगों पर कोई विश्वास नहीं करता और जहां विश्वास नहीं होता, वहां अपनापन, प्रेम, सम्मान कुछ भी नहीं टिकता। एक इंसान चाहे जितना भी योग्य हो, यदि वह मुखौटे लगाकर चलता है तो लोग उससे डरने लगते हैं, उसे अपनाने से कतराने लगते हैं, क्योंकि कोई नहीं जानता कि कब उसका कौन-सा चेहरा सामने आ जाएगा। भगवत गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो कर्मणः यानी अपना कर्तव्य निष्ठा से करो।
पर निष्ठा तभी आती है जब हम सच्चे हों भीतर और बाहर एक जैसे। मुनिश्री ने कहा कि दुनिया को दिखाने के लिए हम लाख चेहरों का उपयोग करें, लेकिन आत्मा के दरबार में, ईश्वर के सामने हम जैसे हैं, वैसे ही खड़े होते हैं। वहां कोई मुखौटा काम नहीं आता तो जीवन में एक ही चेहरा रखो, सच का, सरलता का और सद्भाव का। ऐसा चेहरा ही सबसे सुंदर होता है और सबसे पसंद भी किया जाता है।




