सीकर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्मभूमि के पहले भोग भूमि में कल्पवृक्ष होते थे, जिससे इच्छा पूरी होती थी, इसी प्रकार कामधेनु से भी इच्छित कामना पूर्ण होती थी। आचार्य श्री ने कहा कि वर्तमान में हमारी आत्मा में आत्म तत्व रूपी कल्प वृक्ष है। आत्मा का परिचय जानने का प्रयास करना चाहिए। जन्म के बाद सभी की इच्छाएं असीमित हो जाती है। आप लोग आत्मा की शक्ति को भूल रहे हैं जबकि, आत्मा के पुरुषार्थ से आप ज्ञान प्राप्त कर संसार को जान सकते हैं। सभी को प्राप्त ज्ञान का सदुपयोग धार्मिक कार्य में करना चाहिए। आचार्य श्री ने यह मंगल देशना दंग की नसिया में आचार्य धर्म सागर सभागृह में दी।

विनय पूर्वक दर्शन कर धर्म श्रवण करना चाहिए

डॉ. राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि सीकर दीक्षा गुरु आचार्य धर्मसागर जी की समाधि स्थल के कारण प्रसिद्धि को प्राप्त है। इस चातुर्मास में भी मुनि प्रभाष सागर जी, आर्यिका श्री जिनेश मति, आर्यिका श्री सुदृष्टि मति जी की संलेखना की तैयारी चल रही है। आप जैसे कार्य करते हैं उस अनुसार शरीर और गति पर्याय मिलती है। सभी को देव शास्त्र एवं गुरु के समक्ष विनय पूर्वक दर्शन कर धर्म श्रवण करना चाहिए। साधु को आहार देने में ही मनुष्य जीवन की सार्थकता है।

शांति आपकी आत्मा में है

जीवन अनमोल है समय का सदुपयोग कर अच्छे कार्य करना चाहिए ज्ञान आत्मा का स्वरूप है। गुरुओं के उपदेश को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। अच्छा कार्य करना ही संस्कृति है। संस्कार घर से ही प्रारंभ होते हैं। आचार्य श्री के उपदेश के पूर्व आर्यिका श्री महायश मति माताजी ने बताया कि सभी को कष्ट दूर होने पर शांति मिलती है। शांति आपकी आत्मा में है। केवल खोजने का प्रयास करना चाहिए।

नम्रता ,निर्भयता प्रेम को अपनाएं

माताजी ने महत्वपूर्ण सूत्र में बताया कि प्रत्येक क्रिया विवेक पूर्वक कर दुःख,मृत्यु ,धर्म के लिए तैयार रहना ,सभी को कम बोलना , मीठा बोलना,काम होने पर ही बोलना चाहिए। इससे अनावश्यक कर्म बंध नहीं होता है। कर्म ही जीवन में सुख और दुख देते हैं। देव शास्त्र गुरु की विनय विवेक पूर्वक करना चाहिए। तभी आपके कर्म नष्ट होगे। देव, गुरु धर्म को धारण करना, अहंकार ,तृष्णा क्रोध का त्याग करना, नम्रता ,निर्भयता प्रेम को अपनाना , आलस्य बकवास और खुशामद को दूर करना चाहिए।नीति न्याय और गुरु का सम्मान करना चाहिए।