इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी के घुंघट गार्डन में सन्मति समवशरण पांडाल में मंगलवार को आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा दुनिया के भागदौड़ भरे जीवन में मनुष्य प्रत्येक कार्य को निरंतर करने में लगा हुआ है, लेकिन जिस कार्य की सबसे अधिक आवश्यकता है। वह है आत्मचिंतन और अंतर्मुखता। इसी भाव को व्यक्त करते हुए प्रवचन में कहा गया कि यदि सुबह नहीं कर पाए तो शाम को करके देखिए। जो कार्य आज तक नहीं किया, उसे एक बार करके देखिए, निश्चित ही मन को सुकून मिलेगा।
बाहरी दुनिया में आगे बढ़ने की दौड़ इतनी तेज हो गई
जिनेंद्र भगवान के चरणों में कुछ पल समर्पित करके देखिए, प्रभु के नाम का स्मरण करके देखिए, जिनवाणी का श्रवण कीजिए और कुछ समय प्रवचन एवं स्वाध्याय के लिए निकालिए। इन आध्यात्मिक क्रियाओं के माध्यम से जीवन में शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव किया जा सकता है। प्रवचन में बताया गया कि संसार के सभी कार्य निरंतर चल रहे हैं, लेकिन आत्मा की ओर देखने का कार्य अधूरा रह जाता है। बाहरी दुनिया में आगे बढ़ने की दौड़ इतनी तेज हो गई है कि मनुष्य अपने भीतर की यात्रा करना भूलता जा रहा है।
स्वाध्याय और अंतर्मुखता को समर्पित करें
वास्तविक सुकून बाहरी उपलब्धियों में ही नहीं, बल्कि अपने भीतर झाँकने, आत्मचिंतन करने और प्रभु की भक्ति में कुछ समय बिताने में भी है। आवश्यकता है कि हम अपने व्यस्त जीवन में से कुछ पल निकालकर आध्यात्मिक साधना, स्वाध्याय और अंतर्मुखता को समर्पित करें।




