सनावद। पर्युषण पर्व जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुरे कर्मों का नाश करके हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान महावीर के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर हमें निरंतर और खासकर पर्युषण के दिनों में आत्म साधना में लीन होकर धर्म के बताए गए रास्ते पर चलना चाहिए। पर्युषण का अर्थ है परि यानी चारों ओर से, उषण यानी धर्म की आराधना। सन्मति जैन काका ने बताया कि नगर में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के संघस्थ बाल ब्रह्मचारी संजय भैया इटारसी के सानिध्य में बड़े मंदिर के सामने आचार्य शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय में 16 सितंबर भाद्रपद शुक्ल पंचमी से 25 सितंबर चतुर्दशी तक यह पर्व मनाया जाएगा एवं 27 सितंबर को सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं होंगी
ये दसलक्षण धर्म हैं- क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, संयम, शौच, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं ब्रह्मचर्य। जहां 10 दिनों तक प्रतिदिन मंदिर जी में भैया जी के द्वारा प्रातः पंचामृत अभिषेक, संगीतमय पूजन, तत्पश्चात भैया जी के दस धर्मों पर मंगल प्रवचन व दोपहर में तत्त्वार्थसूत्र की क्लास व शाम को भक्तिमय आरती एवं भैया जी के प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताएं की जाएंगी।





